Class 10 Hindi Ch 4 – Utsah, At Nahi Rahi Hai | All Questions
NCERT CLASS 10 HINDI • KSHITIJ CHAPTER 4 • UTSAH & AT NAHI RAHI HAI • COMPLETE SOLUTIONS

उत्साह, अट नहीं रही है

कवि: सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

उत्साह (Utsah) – प्रश्न-अभ्यास
प्रश्न 1
कवि बादल से फुहार, रिमझिम या बरसने के स्थान पर ‘गरजने’ के लिए कहता है, क्यों?
कवि बादल से फुहार, रिमझिम या बरसने के स्थान पर ‘गरजने’ के लिए इसलिए कहता है क्योंकि ‘गर्जना’ विद्रोह और क्रांति का प्रतीक है। कवि चाहता है कि समाज में भी शोषण के प्रति विद्रोह हो और नई चेतना जगे। बादल का गरजना लोगों में उत्साह और जोश भरता है, जो परिवर्तन लाने के लिए आवश्यक है।
प्रश्न 2
कविता का शीर्षक ‘उत्साह’ क्यों रखा गया है?
कविता का शीर्षक ‘उत्साह’ इसलिए रखा गया है क्योंकि कवि समाज को एक नए उत्साह से भरना चाहता है। वह बादलों के माध्यम से लोगों के जीवन में हो रहे शोषण के प्रति विद्रोह और संघर्ष के लिए प्रेरित करना चाहता है। यह शीर्षक लोगों में जोश, उमंग और नवनिर्माण की भावना जगाने के उद्देश्य से रखा गया है।
प्रश्न 3
कविता में बादल किन-किन अर्थों की ओर संकेत करता है?
कविता में बादल निम्नलिखित अर्थों की ओर संकेत करता है:
  • जीवन रक्षक: समाज में हो रहे शोषण से पीड़ित प्यासी जनता की प्यास बुझाने वाली शक्ति के रूप में।
  • क्रांतिकारी: समाज में उत्साह और क्रांति उत्पन्न करने वाले एक नेता के रूप में।
  • नवनिर्माण: लोगों के हृदय में छिपी बिजली की तरह प्रकाशमान, शोषण रहित समाज की कल्पना और नए जीवन के प्रतीक के रूप में।
प्रश्न 4
शब्दों का ऐसा प्रयोग जिससे कविता के किसी खास भव्य दृश्य में ध्वन्यात्मक प्रभाव पैदा हो, नाद-सौंदर्य कहलाता है। उत्साह कविता में ऐसे कौन से शब्द हैं जिनमें नाद-सौंदर्य मौजूद है, छांटकर लिखें।
कविता की इन पंक्तियों में नाद-सौंदर्य है:
  • “घेर घेर घोर गगन, धाराधर ओ!”
  • “ललित ललित काले घुंघराले, बाल कल्पना के-से पाले”
  • “विद्युत छवि उर में”।
अट नहीं रही है (At Nahi Rahi Hai) – प्रश्न-अभ्यास
प्रश्न 1
छायावाद की एक खास विशेषता है अंतर मन के भावों का बाहर की दुनिया से सामंजस्य बिठाना। कविता की किन-किन पंक्तियों को पढ़कर यह धारणा पुष्ट होती है? लिखिए।
कविता की निम्नलिखित पंक्तियों को पढ़कर यह धारणा पुष्ट होती है:
“कहीं सांस लेते हो
घर घर भर देते हो
उड़ने को नभ में तुम
पर पर कर देते हो”

यहाँ कवि ने फागुन की मादकता और अपने मन की उमंग का ऐसा वर्णन किया है कि बाहर की प्रकृति और भीतर का मन एकरूप हो गए हैं।
प्रश्न 2
कवि की आँख फागुन की सुंदरता से क्यों नहीं हट रही है?
कवि की आँख फागुन की सुंदरता से इसलिए नहीं हट रही है क्योंकि फागुन मास में प्रकृति अपने चरम सौंदर्य पर है। चारों तरफ हरियाली ही हरियाली है। पेड़ों की डालियां पत्तों से लदी हैं और उन पर रंग-बिरंगे फूल खिले हैं। फूलों की खुशबू से पूरा वातावरण महक रहा है। यह प्राकृतिक सुंदरता इतनी मनमोहक है कि कवि चाहकर भी अपनी आँखें नहीं हटा पा रहा है।
प्रश्न 3
प्रस्तुत कविता में कवि ने प्रकृति की व्यापकता का वर्णन किन रूपों में किया है?
प्रस्तुत कविता “अट नहीं रही है” में कवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ ने प्रकृति की व्यापकता का वर्णन करते हुए कहा है कि फागुन का सौंदर्य सर्वत्र व्याप्त है। पेड़ों पर आए नए पत्ते और पुष्प, उनसे फैलने वाली मादक सुगंध, आसमान में उड़ते हुए पक्षी, और खेतों में लहलहाती फसलें – यह सब प्रकृति की व्यापकता और उल्लास को दर्शाते हैं। प्रकृति का सौंदर्य इतना अधिक है कि वह धरती (पात्र) में समा नहीं पा रहा है।
प्रश्न 4
फागुन में ऐसा क्या होता है जो बाकी ऋतुओं से भिन्न होता है?
फागुन मास में प्रकृति का पुनः सृजन होता है। पेड़ों पर नव शाखाएं और रंग-बिरंगे फूल आते हैं। पूरा वातावरण फूलों की सुगंध से सुगंधित हो जाता है। मौसम सुहावना होता है (न अधिक सर्दी, न गर्मी)। पक्षी आसमान में स्वच्छंद विचरण करते हैं। लोगों में खुशी का माहौल होता है। फागुन का यह सौंदर्य और उल्लास इसे अन्य ऋतुओं से भिन्न और विशिष्ट बनाता है।
काव्य शिल्प (Poetic Style)
प्रश्न 5
इन कविताओं के आधार पर निराला के काव्य शिल्प की विशेषताएँ बताएं।
सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ छायावाद के प्रमुख कवि हैं। उनके काव्य शिल्प की विशेषताएँ:
  • प्रकृति चित्रण: वे प्रकृति का सजीव और मानवीकरण रूप में चित्रण करते हैं (जैसे ‘अट नहीं रही है’ में फागुन का मानवीकरण)।
  • प्रतीकात्मकता: ‘उत्साह’ कविता में ‘बादल’ क्रांति और पौरुष का प्रतीक है।
  • भाषा: उनकी भाषा संस्कृतनिष्ठ खड़ी बोली है, जिसमें ओज गुण और प्रवाह है।
  • अलंकार: अनुप्रास, उपमा, रूपक और मानवीकरण अलंकारों का सुंदर प्रयोग (जैसे ‘घेर घेर घोर गगन’ में अनुप्रास)।
  • मुक्त छंद: निराला जी मुक्त छंद के प्रवर्तक माने जाते हैं, उनकी कविताएं तुकांत न होकर भी लयात्मक हैं।
रचना और अभिव्यक्ति (Composition)
प्रश्न 6
होली के आसपास प्रकृति में जो परिवर्तन दिखाई देते हैं, उन्हें लिखिए।
होली के समय (फागुन मास में) प्रकृति में निम्नलिखित परिवर्तन दिखाई देते हैं:
  • पेड़-पौधे नए पत्तों और रंग-बिरंगे फूलों से लद जाते हैं, प्रकृति खूबसूरत हो जाती है।
  • खेतों में गेहूं और सरसों की फसलें सुनहरे रंग में पककर तैयार हो जाती हैं, मानो सोना बिखरा हो।
  • मौसम में हल्की गर्माहट आ जाती है और ठंडी हवाओं की जगह सुहानी बयार (हवा) चलने लगती है।
  • हवा में फूलों की खुशबू फैल जाती है, मधुमक्खियां और तितलियां फूलों पर मंडराने लगती हैं।
  • पक्षियों का कलरव और मधुर संगीत प्रकृति की खूबसूरती को और बढ़ा देता है।
प्रश्न 7
जैसे बादल उमड़-घुमड़कर बारिश करते हैं वैसे ही कवि के अंतर्मन में भी भावों के बादल उमड़-घुमड़कर कविता के रूप में अभिव्यक्त होते हैं। ऐसे ही किसी प्राकृतिक सौंदर्य को देखकर अपने उमड़े भावों को कविता में उतारिए।
(छात्रों के लिए उदाहरण कविता)
नीले नभ में बादल छाए,
धरती ने काजल लगाए।
उमड़-घुमड़ कर जब वो बरसे,
हरियाली में फूल खिलाए।
नदी के जल में आया बहाव,
मौसम में छाया सुहावनापन।
पवन की लहरों में संगीत,
मन में उठे प्रेम का एहसास।
पेड़ों पर मोर नाच उठे,
जंगल में जीवन जाग उठे।
ऐसा है प्रकृति का अद्भुत नज़ारा,
जिसे देख कवि का मन झूम उठे।
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