Class 10 Hindi Ch 9 – Lakhnavi Andaz | All Questions
NCERT CLASS 10 HINDI • KSHITIJ CHAPTER 9 • LAKHNAVI ANDAZ • COMPLETE SOLUTIONS

लखनवी अंदाज़

लेखक: यशपाल (Yashpal)

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास
प्रश्न 1
लेखक को नवाब साहब के किन हाव-भावों से महसूस हुआ कि वे उनसे बातचीत करने के लिए तनिक भी उत्सुक नहीं हैं?
लेखक जब सेकंड क्लास के डिब्बे में दाखिल हुए, तो उन्होंने देखा कि एक सफेदपोश सज्जन (नवाब साहब) पहले से बैठे थे। लेखक को देखते ही उनके चेहरे पर असंतोष और असहजता के भाव आ गए। उन्होंने लेखक की ओर देखने के बजाय खिड़की से बाहर देखना शुरू कर दिया या अपनी सीट पर रखे खीरों को देखने लगे। उनकी आँखों में एकांत भंग होने की झुंझलाहट साफ़ दिखाई दे रही थी, जिससे लेखक को लगा कि वे बातचीत के लिए इच्छुक नहीं हैं।
प्रश्न 2
नवाब साहब ने बहुत ही यत्न से खीरा काटा, नमक-मिर्च बुरका, अंततः सूँघकर ही खिड़की से बाहर फेंक दिया। उन्होंने ऐसा क्यों किया होगा?
नवाब साहब ने ऐसा अपनी नवाबी शान और रईसी दिखाने के लिए किया होगा। लेखक के आ जाने से उन्हें लगा कि एक साधारण आदमी के सामने खीरा जैसी तुच्छ वस्तु खाना उनकी शान के खिलाफ है। उन्होंने खीरे को सूंघकर बाहर फेंककर यह जताना चाहा कि रईस लोग खाने का आनंद केवल सूंघकर (गंध से) ही ले लेते हैं, उन्हें पेट भरने की ज़रूरत नहीं होती। यह उनका ‘लखनवी अंदाज़’ और दिखावा था।
प्रश्न 3
बिना विचार, घटना और पात्रों के भी क्या कहानी लिखी जा सकती है। यशपाल के इस विचार से आप कहाँ तक सहमत हैं?
लेखक ने व्यंग्य में कहा है कि जब बिना खीरा खाए, केवल सूंघने से पेट भरने की डकार आ सकती है, तो बिना विचार, घटना और पात्रों के भी ‘नई कहानी’ लिखी जा सकती है। वास्तव में, हम इस विचार से सहमत नहीं हैं। किसी भी कहानी के लिए घटना, पात्र और विचार का होना अनिवार्य है। बिना इनके कहानी का कोई अस्तित्व या उद्देश्य नहीं हो सकता। लेखक का यह कथन ‘नई कहानी’ आंदोलन की निरर्थकता पर एक कटाक्ष है।
प्रश्न 4
आप इस निबंध को और क्या नाम देना चाहेंगे?
इस निबंध को ‘झूठी शान’ या ‘नवाबी सनक’ नाम दिया जा सकता है। क्योंकि पूरी कहानी में नवाब साहब अपनी झूठी प्रतिष्ठा और दिखावे के लिए खीरे जैसी साधारण चीज़ को भी एक रईसी अंदाज़ में पेश करते हैं और अंत में उसे खाते भी नहीं हैं। यह व्यवहार उनकी सनक और खोखलेपन को दर्शाता है।
रचना और अभिव्यक्ति
प्रश्न 5
(क) नवाब साहब द्वारा खीरा खाने की तैयारी का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
नवाब साहब ने बड़े इत्मीनान से खीरों को निकाला। पहले उन्हें खिड़की से बाहर करके लोटे के पानी से धोया और तौलिए से पोंछा। फिर जेब से चाकू निकालकर उनके सिर काटे और गोदकर कड़वा झाग निकाला। इसके बाद बहुत एहतियात से खीरों को छीलकर उनकी पतली-पतली फाँकें काटीं और उन्हें तौलिए पर करीने से सजाया। उन पर जीरा-मिला नमक और लाल मिर्च बुरकी। इस पूरी प्रक्रिया में उनका मुँह पानी से भर आया था। यह तैयारी किसी महान अनुष्ठान जैसी लग रही थी।
प्रश्न 6
खीरे के संबंध में नवाब साहब के व्यवहार को उनकी सनक कहा जा सकता है। नवाबों की और भी सनकों और शौक के बारे में लिखिए।
नवाबों की सनक और शौक के कई किस्से मशहूर हैं। जैसे, लखनऊ के नवाब वाजिद अली शाह के बारे में कहा जाता है कि जब अंग्रेजों ने आक्रमण किया, तो वे इसलिए नहीं भागे क्योंकि कोई उन्हें जूती पहनाने वाला नहीं था। कुछ नवाब अपने पालतू तीतर-बटेर की लड़ाई पर लाखों रुपये उड़ा देते थे। कुछ पानदान की सजावट और इत्र की खुशबू में ही अपनी पूरी जिंदगी गुज़ार देते थे। यह सब उनकी विलासिता और वास्तविकता से दूर रहने की प्रवृत्ति को दिखाता है।
प्रश्न 7
क्या सनक का कोई सकारात्मक रूप हो सकता है? यदि हाँ तो ऐसी सनकों का उल्लेख कीजिए।
हाँ, सनक का सकारात्मक रूप भी हो सकता है। यदि सनक किसी रचनात्मक कार्य, देशसेवा, या समाज सुधार के लिए हो, तो वह वरदान बन जाती है। जैसे—
  • महात्मा गांधी की सत्य और अहिंसा के प्रति सनक ने देश को आज़ादी दिलाई।
  • दशरथ मांझी की पहाड़ काटकर रास्ता बनाने की सनक ने गाँव की तस्वीर बदल दी।
  • वैज्ञानिकों की खोज करने की सनक नई तकनीकों को जन्म देती है।
सकारात्मक सनक जुनून (Passion) कहलाती है।
भाषा-अध्ययन
प्रश्न 8
निम्नलिखित वाक्यों में से क्रियापद छाँटकर क्रिया-भेद भी लिखिए।
  • (क) बैठे थे – अकर्मक क्रिया
  • (ख) दिखाया – सकर्मक क्रिया
  • (ग) कल्पना करते रहने की – अकर्मक क्रिया
  • (घ) खरीदे होंगे – सकर्मक क्रिया
  • (ङ) सिर काटे, झाग निकाला – सकर्मक क्रिया
  • (च) देखा – सकर्मक क्रिया (फाँकों की ओर)
  • (छ) लेट गए – अकर्मक क्रिया
  • (ज) निकाला – सकर्मक क्रिया (चाकू)
पाठेतर सक्रियता
प्रश्न 1
अपनी मातृभाषा के शिष्टाचार सूचक कथनों की एक सूची तैयार कीजिए।
हिंदी (शिष्टाचार सूचक कथन):
  • नमस्ते / नमस्कार / प्रणाम
  • कृपया (Please)
  • धन्यवाद / शुक्रिया (Thank you)
  • क्षमा कीजिए / माफ़ कीजिए (Sorry)
  • आप कैसे हैं?
  • पधारिए / तशरीफ़ रखिए (Welcome/Sit down)
  • आपकी बड़ी कृपा है।
प्रश्न 2
‘खीरा—मेदे पर बोझ डाल देता है’ क्या वास्तव में खीरा अपच करता है? बड़ों से बातचीत कर पता लगाइए।
खीरा वैसे तो सुपाच्य और पानी से भरपूर होता है, लेकिन कुछ स्थितियों में यह भारी पड़ सकता है:
  • रात के समय खीरा खाने से पाचन धीमा हो सकता है (आयुर्वेद के अनुसार)।
  • खीरे के ऊपर पानी पीने से भी अपच हो सकती है।
  • कमज़ोर पाचन तंत्र (मेदे) वाले लोगों को इसे पचाने में दिक़्क़त हो सकती है।
नवाब साहब ने यह बात सिर्फ़ खीरा न खाने का बहाना बनाने के लिए कही थी।
लघु एवं अति लघु उत्तरीय प्रश्न
Q1
लेखक ने सेकंड क्लास का टिकट क्यों लिया?
लेखक ने भीड़ से बचने, एकांत में नई कहानी सोचने और खिड़की से प्राकृतिक दृश्य देखने के लिए सेकंड क्लास का महँगा टिकट लिया।
Q2
डिब्बे में नवाब साहब को देखकर लेखक ने क्या अनुमान लगाया?
लेखक ने अनुमान लगाया कि नवाब साहब शायद अकेले सफर का वक्त काटने के लिए खीरे खरीदे होंगे और अब एक सफेदपोश (लेखक) के सामने उन्हें खाने में संकोच महसूस कर रहे हैं।
Q3
नवाब साहब ने खीरे की फाँकों का वास्तव में क्या किया?
उन्होंने एक-एक करके खीरे की फाँकों को होठों तक ले जाकर सूँघा, स्वाद की कल्पना में आँखें मूंद लीं और फिर खिड़की से बाहर फेंक दिया।
Q4
लेखक ने नवाब के डकार को किससे जोड़ा?
लेखक ने नवाब के डकार को “नई कहानी” की उस प्रवृत्ति से जोड़ा जो बिना ठोस विषय, घटना या पात्रों के, केवल शैली और अमूर्तता (Abstractness) के दम पर लिखी जाती है।
Q5
कहानी में ‘लखनवी अंदाज़’ किसे कहा गया?
नवाब साहब के उस दिखावटी और कृत्रिम व्यवहार को ‘लखनवी अंदाज़’ कहा गया, जहाँ वे खीरा खाने की इच्छा रखते हुए भी अपनी झूठी शान (रईसी) के लिए उसे बिना खाए फेंक देते हैं।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
Q1
नवाब साहब द्वारा खीरों को खिड़की से बाहर फेंकना किस सामाजिक विडंबना को उजागर करता है?
यह घटना पतनशील सामंती वर्ग (Feudal Class) की विडंबना को उजागर करती है। नवाब साहब जैसे लोग अपनी पुरानी रईसी खो चुके हैं, लेकिन उनकी अकड़ और दिखावा अभी भी बरकरार है। वे वास्तविकता (भूख/इच्छा) को स्वीकारने के बजाय ‘खानदानी तहज़ीब’ के नाम पर ढोंग करते हैं। वे आम आदमी के सामने खीरा जैसी सस्ती चीज़ खाने में शर्मिंदगी महसूस करते हैं। यह समाज के उस खोखलेपन को दिखाता है जहाँ ‘दिखावा’ जीवन का सत्य बन गया है।
Q2
“लखनवी अंदाज” शीर्षक की सार्थकता पर प्रकाश डालें।
“लखनवी अंदाज” शीर्षक पूरी तरह सार्थक और व्यंग्यात्मक है। लखनऊ अपनी नज़ाकत और नफ़ासत के लिए जाना जाता है। कहानी में नवाब साहब का हर कार्य—बैठने का ढंग, खीरा धोने और काटने की कला, उसे सजाना, और अंततः सूंघकर फेंक देना—सब कुछ एक विशेष ‘अंदाज़’ में होता है। यह अंदाज़ वास्तविकता से परे, केवल प्रदर्शन के लिए है। लेखक ने इसी बनावटी जीवन-शैली पर कटाक्ष करने के लिए यह शीर्षक चुना है।
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