Class 10 Hindi Sparsh Ch 12 – Ab Kahan Dusre Ke Dukh Se Dukhi Hone Wale | All Questions
NCERT CLASS 10 HINDI (SPARSH) • CHAPTER 12 • AB KAHAN DUSRE KE DUKH SE DUKHI HONE WALE • COMPLETE SOLUTIONS

अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले

लेखक: निदा फाज़ली (Nida Fazli)

लघु प्रश्न-उत्तर (Short Questions)
प्रश्न 1
बड़े बड़े बिल्डर समुद्र को पीछे क्यों धकेल रहे थे?
आबादी (जनसंख्या) बढ़ने के कारण रहने के लिए स्थान का अभाव हो रहा था। इसलिए बिल्डर नई-नई इमारतें बनाने के लिए और ज़मीन हथियाने के लिए बड़े-बड़े बिल्डर समुद्र को पीछे धकेल रहे थे.
प्रश्न 2
लेखक का घर किस शहर में था?
लेखक का घर ग्वालियर शहर में था.
प्रश्न 3
जीवन कैसे घरों में सिमटने लगा है?
संयुक्त परिवारों के टूटने और एकल परिवारों के चलन बढ़ने के कारण, अब जीवन डिब्बों जैसे फ्लैटों में सिमटने लगा है। पहले की तरह बड़े-बड़े आंगन वाले घर अब नहीं रहे.
प्रश्न 4
कबूतर परेशानी में इधर-उधर क्यों फड़फड़ा रहे थे?
कबूतर के घोंसले में दो अंडे थे। एक बिल्ली ने एक अंडा तोड़ दिया था। दूसरे अंडे को बिल्ली से बचाने के चक्कर में माँ (लेखक की माँ) से वह दूसरा अंडा भी टूट गया। इसी दुख और परेशानी में कबूतर इधर-उधर फड़फड़ा रहे थे.
विस्तृत प्रश्न-उत्तर (Long Questions)
प्रश्न 5
अरब में लशकर को नूह के नाम से क्यों याद करते हैं?
अरब में लशकर को नूह के नाम से इसलिए याद करते हैं क्योंकि वे हमेशा दूसरों के दुःख में दुखी रहते थे। नूह को पैगम्बर या ईश्वर का दूत भी कहा गया है। उनके मन में करुणा कूट-कूट कर भरी थी। एक बार एक घायल कुत्ते को देखकर उन्हें बहुत पछतावा हुआ था और वे रोए थे.
प्रश्न 6
लेखक की माँ किस समय पेड़ों के पत्ते तोड़ने के लिए मना करती थीं और क्यों?
लेखक की माँ रात होने पर (सूरज ढलने के बाद) पेड़ों के फूल-पत्ते तोड़ने पर मना करती थीं। उनका मानना था कि रात में पेड़-पौधे सोते हैं और अगर उन्हें छेड़ा जाए तो वे रोते हैं और श्राप (बददुआ) देते हैं। दीया-बत्ती के समय फूल तोड़ने से वे नाराज होते हैं.
प्रश्न 7
प्रकृति में आए असंतुलन का क्या परिणाम हुआ?
प्रकृति में आए असंतुलन का मानव जीवन पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ा है। इसके परिणामस्वरुप:
  • अनेक बीमारियाँ बढ़ गई हैं।
  • प्राकृतिक आपदाएँ जैसे भूकंप, बाढ़, तूफान, बेवक्त की बारिश और अतिवृष्टि बढ़ गई है।
  • गर्मी अधिक पड़ने लगी है और मौसम का चक्र बिगड़ गया है.
प्रश्न 8
लेखक की माँ ने पूरे दिन रोज़ा क्यों रखा?
लेखक की माँ से गलती से कबूतर का दूसरा अंडा टूट गया था। इस गलती का प्रायश्चित करने के लिए और पाप से माफी मांगने के लिए उन्होंने पूरे दिन रोज़ा (उपवास) रखा। उन्होंने न कुछ खाया और न पिया, बस नमाज़ पढ़कर रोती रहीं और खुदा से अपनी गलती की माफी मांगती रहीं.
प्रश्न 9
लेखक ने ग्वालियर से बंबई तक किन बदलावों को महसूस किया?
लेखक ने महसूस किया कि पहले ग्वालियर में घर बड़े-बड़े होते थे और उनमें आंगन (दालान) होते थे जहाँ सब मिलजुल कर रहते थे। लेकिन बंबई (मुंबई) के वर्सोवा में आकर स्थिति बदल गई। यहाँ बड़े-बड़े बिल्डरों ने समुद्र को पीछे धकेलकर ज़मीन हथिया ली है और अब कबूततरों के लिए घरौंदे (घोंसले) बनाने की जगह भी नहीं बची है। पहले जहाँ जंगल और पेड़-पौधे थे, अब वहाँ कंक्रीट की इमारतें खड़ी हो गई हैं। पशु-पक्षियों के लिए कोई स्थान नहीं रहा.
प्रश्न 10
शेख अयाज़ के पिता अपने बाजू पर काला च्योंटा रेंगता देख भोजन छोड़ कर क्यों उठ खड़े हुए?
शेख अयाज़ के पिता जब कुएं से नहाकर लौटे और भोजन करने बैठे, तो उन्होंने देखा कि एक काला च्योंटा (कीड़ा) उनके बाजू पर रेंग रहा है। उन्हें अहसास हुआ कि वे उस बेघर च्योंटे को उसके घर (कुएं) से दूर ले आए हैं। उसे वापस उसके घर छोड़ने के लिए वे भोजन छोड़कर उठ खड़े हुए। यह उनकी संवेदनशीलता और जीवों के प्रति दया को दर्शाता है.
आशय स्पष्ट कीजिए (Explanation)
प्रश्न 11
मिट्टी से मिट्टी मिले, खो के सभी निशान, किसमें कितना कौन है, कैसे हो पहचान?
आशय: इन पंक्तियों का आशय यह है कि सभी प्राणी (मनुष्य और पशु-पक्षी) अंततः मिट्टी से ही बने हैं और मरने के बाद उसी मिट्टी में मिल जाते हैं। मिट्टी में मिल जाने के बाद किसी की पहचान नहीं रहती कि कौन राजा था और कौन रंक, या कौन मनुष्य था और कौन जानवर। सब एक समान हो जाते हैं। इसलिए हमें जीवन में भेदभाव नहीं करना चाहिए.
प्रश्न 12
नेचर की सहनशक्ति की एक सीमा होती है। नेचर के गुस्से का एक नमूना कुछ साल पहले बंबई में देखने को मिला था।
आशय: मनुष्य लगातार प्रकृति के साथ खिलवाड़ कर रहा है, समुद्र को पाटकर बस्तियाँ बसा रहा है और पेड़ों को काट रहा है। प्रकृति (नेचर) भी एक सीमा तक ही सहन करती है। जब वह सीमा पार हो जाती है, तो प्रकृति अपना विकराल रूप दिखाती है। बंबई में आया भयानक तूफान (सुनामी/बाढ़) इसी गुस्से का नतीजा था, जिसने तीन बड़े जहाजों को बच्चों की गेंद की तरह उछाल दिया था.
प्रश्न 13
जो जितना बड़ा होता है उसे उतना ही कम गुस्सा आता है।
आशय: महान और बड़े लोगों (या विशाल प्राकृतिक शक्तियों जैसे समुद्र) में क्षमा करने की क्षमता अधिक होती है। वे छोटी-मोटी गलतियों पर गुस्सा नहीं करते। समुद्र भी बहुत विशाल और महान है, उसने मनुष्यों की गलतियों को बहुत सहा। लेकिन जब उसे लगातार तंग किया गया (उसकी ज़मीन छीनी गई), तब उसे गुस्सा आया। आमतौर पर महान व्यक्तित्व शांत और गंभीर होते हैं.
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