हे भूख! मत मचल (Hey Bhookh Mat Machal)
एनसीईआरटी समाधान • कक्षा 11 हिंदी (आरोह) • अक्का महादेवीवचन के साथ (Textbook Questions)
1. लक्ष्य प्राप्ति में इंद्रियाँ बाधक होती हैं — इसके संदर्भ में अपने तर्क दीजिए।
लक्ष्य प्राप्ति (ईश्वर प्राप्ति) में इंद्रियाँ सबसे बड़ी बाधा हैं क्योंकि:
- भटकाव: भूख, प्यास, नींद और मोह मनुष्य को सांसारिक सुखों में उलझाए रखते हैं।
- एकाग्रता भंग: जब तक व्यक्ति शारीरिक आवश्यकताओं (इंद्रियों) का गुलाम रहता है, उसका मन ईश्वर में एकाग्र नहीं हो सकता।
- माया का जाल: लोभ, मोह, ईर्ष्या और मद (अहंकार) मनुष्य को सत्य के मार्ग से विचलित कर देते हैं। अक्का महादेवी इसीलिए अपनी इंद्रियों को संयमित रहने का आग्रह करती हैं।
2. “ओ चराचर! मत चूक अवसर” — इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
आशय: कवयित्री समस्त संसार (चराचर – जड़ और चेतन) को संबोधित कर रही हैं।
वे कहती हैं कि मानव जीवन बहुत दुर्लभ है। यह ईश्वर (शिव/चन्नमल्लिकार्जुन) को पाने का स्वर्णिम ‘अवसर’ है। सांसारिक मोह-माया में पड़कर इस अवसर को नहीं गंवाना चाहिए। अभी समय है, अपनी इंद्रियों पर विजय प्राप्त करो और शिव की भक्ति में लीन हो जाओ।
वे कहती हैं कि मानव जीवन बहुत दुर्लभ है। यह ईश्वर (शिव/चन्नमल्लिकार्जुन) को पाने का स्वर्णिम ‘अवसर’ है। सांसारिक मोह-माया में पड़कर इस अवसर को नहीं गंवाना चाहिए। अभी समय है, अपनी इंद्रियों पर विजय प्राप्त करो और शिव की भक्ति में लीन हो जाओ।
3. ईश्वर के लिए किस दृष्टांत का प्रयोग किया गया है? ईश्वर और उसके साम्य का आधार बताइए।
[Image of Jasmine flower]
ईश्वर (चन्नमल्लिकार्जुन) के लिए ‘जूही के फूल’ (Jasmine Flower) के दृष्टांत (Metaphor) का प्रयोग किया गया है।
साम्य का आधार:
साम्य का आधार:
- कोमलता: जैसे जूही का फूल अत्यंत कोमल होता है, वैसे ही ईश्वर भी भक्तों के लिए कोमल और दयालु हैं।
- सुगंध: जैसे फूल की सुगंध सर्वत्र फैलती है, वैसे ही ईश्वर की सत्ता कण-कण में व्याप्त है।
- नश्वरता vs अमरता: (विपरीत आधार) फूल नश्वर है, पर उसकी सुगंध (ईश्वर का सार) शाश्वत है।
4. ‘अपना घर’ से क्या तात्पर्य है? इसे भूलने की बात क्यों कही गई है?
तात्पर्य: ‘अपना घर’ से तात्पर्य सांसारिक मोह-माया, अहंकार (Ego) और ‘मैं’ की भावना से है।
क्यों भूलना है: जब तक मनुष्य ‘मेरा घर’, ‘मेरा परिवार’, ‘मेरी संपत्ति’ में उलझा रहता है, वह ईश्वर को नहीं पा सकता। ईश्वर के घर में प्रवेश करने के लिए ‘अपने घर’ (अहंकार) का त्याग करना अनिवार्य है।
क्यों भूलना है: जब तक मनुष्य ‘मेरा घर’, ‘मेरा परिवार’, ‘मेरी संपत्ति’ में उलझा रहता है, वह ईश्वर को नहीं पा सकता। ईश्वर के घर में प्रवेश करने के लिए ‘अपने घर’ (अहंकार) का त्याग करना अनिवार्य है।
5. दूसरे वचन में ईश्वर से क्या कामना की गई है और क्यों?
दूसरे वचन (“हे मेरे जूही के फूल जैसे ईश्वर…”) में कवयित्री ने ईश्वर से कामना की है कि उनका सब कुछ नष्ट हो जाए।
- वे चाहती हैं कि उनसे भीख मांगने के लिए भी कटोरा न रहे, रहने को घर न हो।
- यदि वे गिरे, तो कोई उठाने वाला न हो।
वचन के आस-पास (Around the Lesson)
1. क्या अक्का महादेवी को ‘कन्नड़ की मीरा’ कहा जा सकता है? चर्चा करें।
हाँ, अक्का महादेवी को ‘कन्नड़ की मीरा’ कहना सर्वथा उचित है। दोनों में कई समानताएँ हैं:
- राजसी त्याग: मीरा ने मेवाड़ का राजघराना छोड़ा, अक्का महादेवी ने राजा कौशिक का महल और वस्त्र-आभूषण त्यागे।
- अनन्य भक्ति: मीरा ‘गिरधर गोपाल’ की दीवानी थीं, अक्का ‘चन्नमल्लिकार्जुन’ (शिव) की।
- विद्रोह: दोनों ने अपने समय की रूढ़िवादी सामाजिक परंपराओं को तोड़कर स्त्री-स्वतंत्रता की मिसाल कायम की।
- माधुर्य भाव: दोनों ने ईश्वर को ‘पति’ या ‘प्रियतम’ मानकर भक्ति की।
शब्द-छवि (Word Meanings)
| शब्द (Word) | अर्थ (Meaning) |
|---|---|
| पाश | बंधन / जकड़न (Trap/Bondage) |
| ढील | शिथिलता / ढीला करना (Looseness) |
| मद | नशा / अहंकार (Intoxication/Pride) |
| चराचर | जड़ और चेतन संसार (Animate and Inanimate world) |
| चन्नमल्लिकार्जुन | शिव (मल्लिका यानी जूही के फूल जैसे श्वेत और सुगंधित ईश्वर) |
| लोभ | लालच (Greed) |
| ईर्ष्या | जलन (Jealousy) |