मियाँ नसीरुद्दीन (Miya Nasiruddin)

एनसीईआरटी समाधान • कक्षा 11 हिंदी (आरोह) • कृष्णा सोबती
पाठ के साथ (Textbook Questions)
1. मियाँ नसीरुद्दीन को नानबाइयों का मसीहा क्यों कहा गया है?
मियाँ नसीरुद्दीन को नानबाइयों का मसीहा इसलिए कहा गया है क्योंकि:
  • वे मसीहाई अंदाज़ में रोटी पकाते थे।
  • वे अपने पेशे को केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि एक ‘कला’ (Art) मानते थे।
  • उनके पास 56 प्रकार की रोटियाँ बनाने का हुनर था।
  • वे अपने खानदान के इस पेशे पर गर्व करते थे और खुद को खानदानी नानबाई मानते थे।
2. लेखिका मियाँ नसीरुद्दीन के पास क्यों गई थीं?
लेखिका (कृष्णा सोबती) एक पत्रकार की हैसियत से मियाँ नसीरुद्दीन के पास गई थीं। वे उनकी रोटी बनाने की कारीगरी (हुनर) के बारे में जानकारी लेना चाहती थीं ताकि उसे अपने अखबार में प्रकाशित कर सकें। उन्होंने सुना था कि मियाँ 56 तरह की रोटियाँ बनाने के लिए मशहूर हैं।
3. बादशाह के नाम का प्रसंग आते ही लेखिका की बातों में मियाँ नसीरुद्दीन की दिलचस्पी क्यों खत्म होने लगी?
मियाँ नसीरुद्दीन की दिलचस्पी इसलिए खत्म होने लगी क्योंकि वे अपने पूर्वजों की तारीफ में बढ़ा-चढ़ाकर बातें कर रहे थे, लेकिन उनके पास किसी विशिष्ट ‘बादशाह’ का नाम या प्रमाण नहीं था। यह सब सुनी-सुनाई बातें थीं। जब लेखिका ने सबूत के तौर पर बादशाह का नाम पूछा, तो वे असहज हो गए और उन्हें लगा कि उनकी झूठ पकड़ी जा सकती है, इसलिए उन्होंने बेरुखी दिखानी शुरू कर दी।
4. मियाँ नसीरुद्दीन के चेहरे पर किसी दबे हुए अंधड़ के आसार देख यह मजमून न छेड़ने का फैसला किया।
संदर्भ: लेखिका मियाँ से यह पूछना चाहती थीं कि उनके बुजुर्ग किस बादशाह के यहाँ काम करते थे।
स्पष्टीकरण: मियाँ नसीरुद्दीन पहले ही बादशाह का नाम पूछने पर चिढ़ गए थे। उन्होंने गुस्से में कहा कि “क्या आपको उनकी चिट्ठी-पत्री भेजनी है?” उनके चेहरे पर तनाव (अंधड़) देखकर लेखिका ने समझदारी दिखाई और बादशाह के बारे में और सवाल नहीं पूछे, नहीं तो मियाँ और अधिक नाराज हो जाते।
5. पाठ में मियाँ नसीरुद्दीन का शब्दचित्र लेखिका ने कैसे खींचा है?
लेखिका ने मियाँ का बहुत सजीव शब्दचित्र खींचा है:
“हमने जो अंदर झाँका तो पाया, मियाँ चारपाई पर बैठे बीड़ी का मज़ा ले रहे हैं। मौसमों की मार से पका चेहरा, आँखों में काइयाँपन (चालाकी) और भोलापन, और पेशानी (माथे) पर मंझे हुए कारीगर के तेवर।”
पाठ के आस-पास (Around the Lesson)
1. मियाँ नसीरुद्दीन की कौन-सी बातें आपको अच्छी लगीं?
  • आत्मविश्वास: वे अपने पेशे पर गर्व करते थे और खुद को सर्वश्रेष्ठ मानते थे।
  • स्पष्टवादिता: वे बेबाक तरीके से बात करते थे।
  • कर्मठता: वे मानते थे कि काम सीखने से आता है, केवल बातों से नहीं (“तालीम की तालीम बड़ी चीज़ है”)।
2. ‘तालीम की तालीम ही बड़ी चीज़ होती है’ — यहाँ ‘तालीम’ शब्द का दो बार प्रयोग क्यों हुआ है?
यहाँ शब्द का प्रयोग भिन्न अर्थों में हुआ है:
1. पहली ‘तालीम’: इसका अर्थ है शिक्षा या उपदेश।
2. दूसरी ‘तालीम’: इसका अर्थ है उस शिक्षा का पालन करना, अभ्यास करना या व्यावहारिक ज्ञान।
अर्थ: मियाँ कहना चाहते हैं कि सिर्फ शिक्षा लेना काफी नहीं है, उस शिक्षा को व्यवहार में लाना और उसका अभ्यास करना ही असली हुनर है।
3. मियाँ नसीरुद्दीन तीसरी पीढ़ी के हैं। आजकल लोग अपने पारंपरिक व्यवसाय क्यों नहीं अपना रहे?
इसके कई कारण हैं:
  • कम आय: पुराने व्यवसायों में मेहनत ज्यादा और कमाई कम है।
  • सम्मान की कमी: समाज में हाथ के हुनर (Manual labor) को कमतर आंका जाता है।
  • मशीनीकरण: मशीनों के आने से हाथ के कारीगरों की माँग घट गई है।
  • नई तकनीक: युवा पीढ़ी नई तकनीक और व्हाइट कॉलर जॉब्स (दफ्तर की नौकरी) की ओर आकर्षित है।
भाषा की बात (Language Study)
1. वाक्यों का इस्तेमाल (Sentences):
  • पंचहज़ारी अंदाज़: उसने मेरी बात सुनकर पंचहज़ारी अंदाज़ में सिर हिलाया, मानो वह कोई बहुत बड़ा अधिकारी हो।
  • आँखों के कंचे फेरना: मेरे सवाल पर उसने आँखों के कंचे हम पर फेर दिए, जैसे वह मुझे पहचानता ही न हो।
  • आ बैठे उन्हीं के ठीये पर: पिता के रिटायर होने के बाद, बेटा आ बैठा उन्हीं के ठीये पर और दुकान सँभालने लगा।
2. ‘बिटर-बिटर देखना’ (देखने के प्रकार):
  • घूर-घूर कर देखना: वह मुझे गुस्से में घूर-घूर कर देख रहा था।
  • टकटकी लगाकर देखना: बच्चा खिलौने को टकटकी लगाकर देख रहा है।
  • चोरी-चोरी देखना: वह चोरी-चोरी देख रहा था कि कोई आ तो नहीं रहा।
  • सहम कर देखना: पुलिस को देखकर चोर सहम कर देखने लगा।
3. शब्द-क्रम परिवर्तन (Sentence Reordering):
(क) मियाँ छप्पन किस्म की रोटियाँ बनाने के लिए मशहूर हैं।
(ख) थोड़ा वक्त निकाल लेंगे।
(ग) बात दिमाग में चक्कर काट गई है।
(घ) जनाब, रोटी आँच से पकती है।
शब्द-छवि (Word Meanings)
शब्द (Word) अर्थ (Meaning)
नानबाईतरह-तरह की रोटी बनाने-बेचने वाला
काइयाँधूर्त, चालाक
पेशानीमाथा, मस्तक
अखबारनवीसपत्रकार
खुराफातशरारत
इल्मजानकारी, ज्ञान
वालियापिता
मरहूमजिसकी मृत्यु हो चुकी हो (स्वर्गीय)
नसीहतसीख, शिक्षा
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