विदाई संभाषण (Vidai Sambhashan)

एनसीईआरटी समाधान • कक्षा 11 हिंदी (आरोह) • बालमुकुंद गुप्त
पाठ के साथ (Textbook Questions)
1. शिवशंभु की दो गायों की कहानी के माध्यम से लेखक क्या कहना चाहता है?
लेखक इस कहानी के माध्यम से यह कहना चाहता है कि:
  • भावनात्मक जुड़ाव: भारत के लोग (पशु-पक्षी तक) साथ रहने वालों से गहरा भावनात्मक संबंध बना लेते हैं।
  • विदाई का दुख: बिछड़ते समय वैर-भाव भुला दिया जाता है। जो गाय (शक्तिशाली) दूसरी गाय (कमजोर) को मारती थी, उसके जाने पर भी कमजोर गाय दुखी थी और उसने चारा नहीं खाया।
  • व्यंग्य: लेखक लॉर्ड कर्जन को यह एहसास दिलाना चाहता है कि भारत की जनता इतनी उदार है कि वह अत्याचारी शासक के जाने पर भी दुखी होती है, यदि शासक थोड़ा भी स्नेह दिखाता।
2. ‘आठ करोड़ प्रजा के गिड़गिड़ाकर विच्छेद न करने की प्रार्थना पर आपने ज़रा भी ध्यान नहीं दिया’ — यहाँ किस ऐतिहासिक घटना की ओर संकेत किया गया है?
यहाँ **’बंग-भंग’ (बंगाल विभाजन – 1905)** की ऐतिहासिक घटना की ओर संकेत किया गया है।
लॉर्ड कर्जन ने भारतीय जनता के भारी विरोध और प्रार्थनाओं को अनसुना करते हुए अपनी जिद पूरी करने के लिए बंगाल को दो भागों (पूर्वी और पश्चिमी बंगाल) में बाँट दिया था, जिसका उद्देश्य हिंदू- मुस्लिम एकता को तोड़ना था।
3. कर्जन को इस्तीफा क्यों देना पड़ गया?
कर्जन को इस्तीफा इसलिए देना पड़ा क्योंकि:
  • वे ‘काउंसिल’ में अपने एक चहेते अंग्रेज अधिकारी को फौजी पद पर नियुक्त करना चाहते थे।
  • ब्रिटिश सरकार ने उनकी यह माँग खारिज कर दी।
  • गुस्से में आकर कर्जन ने इस्तीफे की धमकी दी, जिसे ब्रिटिश सरकार ने तुरंत स्वीकार कर लिया। इस अपमान के कारण उन्हें भारत छोड़ना पड़ा।
4. “विचारिए तो, क्या शान आपकी इस देश में थी और अब क्या हो गई! कितने ऊँचे होकर आप कितने नीचे गिरे!” — आशय स्पष्ट कीजिए।
आशय: लेखक कर्जन के उत्थान और पतन का चित्रण कर रहा है।
पहले (शान): भारत में कर्जन की शक्ति असीम थी। उनकी सवारी सबसे ऊँची होती थी, राजा-महाराजा उनके सामने हाथ बांधे खड़े रहते थे, और ईश्वर के बाद उन्हीं का दर्जा माना जाता था।
अब (पतन): इस्तीफे के बाद उनकी स्थिति इतनी दयनीय हो गई कि एक फौजी अफसर भी उनके कहने पर नियुक्त नहीं हो सका। उन्हें अपमानित होकर बेआबरू होकर देश से जाना पड़ा।
5. ‘आपके और यहाँ के निवासियों के बीच में कोई तीसरी शक्ति और भी है’ — यहाँ तीसरी शक्ति किसे कहा गया है?
यहाँ **’तीसरी शक्ति’** ब्रिटिश साम्राज्य की महारानी विक्टोरिया (या ब्रिटिश पार्लियामेंट/ईश्वर) को कहा गया है।
लेखक का भाव यह है कि न तो कर्जन अपनी मर्जी से सब कुछ कर सकते हैं और न ही भारत की जनता। दोनों के ऊपर एक सर्वोच्च शक्ति है जो भाग्य और शासन का निर्णय करती है, जिसके आगे वायसराय भी विवश है।
पाठ के आस-पास (Around the Lesson)
1. बालमुकुंद गुप्त ने ‘शिवशंभु’ नाम का उपयोग क्यों किया होगा?
उस समय (अंग्रेजी शासन में) प्रेस पर बहुत पाबंदियाँ थीं। सीधे सरकार की आलोचना करने पर जेल हो सकती थी या अखबार बंद हो सकता था।
इसलिए, लेखक ने **’शिवशंभु’** (एक काल्पनिक, भांग पीने वाला बूढ़ा ब्राह्मण) के पात्र का सहारा लिया ताकि वह नशे की मौज में कड़वी से कड़वी बात भी हँसी-मजाक में कह सके और अंग्रेजों को बुरा भी न लगे (सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे)।
2. “नादिर से भी बढ़कर आपकी जिद्द है” — कर्जन के संदर्भ में क्या आपको यह बात सही लगती है?
हाँ, यह तुलना सही लगती है।
  • नादिरशाह: उसने दिल्ली में कत्लेआम करवाया था, लेकिन जब आसिफजाह ने तलवार गले में डालकर प्रार्थना की, तो उसने कत्लेआम रोक दिया। यानी उसने भी प्रार्थना सुनी।
  • लॉर्ड कर्जन: इन्होंने बंगाल विभाजन (Partition of Bengal) किया। 8 करोड़ जनता ने गिड़गिड़ाकर इसे रोकने की प्रार्थना की, लेकिन कर्जन ने अपनी जिद्द नहीं छोड़ी। इस अर्थ में उनकी निष्ठुरता नादिरशाह से भी अधिक थी।
3. क्या आँख बंद करके मनमाने हुक्म चलाना शासन है?
जी नहीं। ‘शासन’ का अर्थ है प्रजा की इच्छा और हितों का ध्यान रखना।
आँख बंद करके हुक्म चलाना, प्रजा की बात न सुनना और केवल अपनी जिद्द पूरी करना ‘शासन’ नहीं, बल्कि **’तानाशाही’ (Dictatorship)** या निरंकुशता है। एक सच्चे शासक को प्रजा की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।
4. अलिफ लैला, अलहदीन (अलादीन), अबुल हसन और बगदाद के खलीफा के बारे में जानकारी।
  • अलिफ लैला (Alif Laila): यह ‘अरेबियन नाइट्स’ (Arabian Nights) कहानियों का संग्रह है।
  • अलादीन (Aladdin): एक प्रसिद्ध कहानी का नायक जिसके पास जादुई चिराग था।
  • अबुल हसन: अलिफ लैला का एक पात्र जिसे खलीफा हारूँ-अल-रशीद ने मजाक में एक दिन के लिए खलीफा बना दिया था। (लेखक कर्जन की तुलना अबुल हसन से करते हैं, जिनका शासन भी अस्थायी सपना था)।
गौर करने की बात (To be noted)
(क) इससे आपका जाना भी परंपरा की चाल से कुछ अलग नहीं है, तथापि आपके शासनकाल का नाटक घोर दुखांत है…
व्याख्या: लेखक लॉर्ड कर्जन के शासनकाल की तुलना एक नाटक से कर रहे हैं।
आमतौर पर, कोई भी शासक आता है तो उसे जाना ही पड़ता है (परंपरा), लेकिन कर्जन का जाना बहुत ही अपमानजनक (दुखांत) रहा।
यहाँ सूत्रधार (ईश्वर या ब्रिटिश सरकार) को पता था कि अंत क्या होगा, लेकिन कर्जन (मुख्य पात्र) को लगता था कि यह नाटक सुखांत (Happy Ending) होगा। उन्हें अपनी शक्ति पर घमंड था, लेकिन अंत में उन्हें बेइज्जत होकर जाना पड़ा।
(ख) यहाँ की प्रजा ने आपकी जिद्द का फल यहीं देख लिया…
व्याख्या: यह पंक्ति ‘कर्मों के फल’ की ओर संकेत करती है।
कर्जन ने ‘बंगाल विभाजन’ की जिद्द की, जिससे भारतीय प्रजा को बहुत पीड़ा हुई। लेकिन उस जिद्द का फल कर्जन को भी यहीं भुगतना पड़ा। उन्हें भी इस्तीफा देने की पीड़ा और अपमान सहना पड़ा। लेखक कहना चाहते हैं कि दूसरों को दुख देने वाला स्वयं भी सुखी नहीं रह सकता।
भाषा की बात (Language Study)
1. ‘पधारें’ शब्द का अर्थ (दुहराव)
सामान्यतः ‘पधारें’ का अर्थ ‘आना’ होता है, लेकिन यहाँ व्यंग्य में इसका प्रयोग कर्जन के ‘चले जाने’ (विदा होने) के लिए किया गया है।
2. भारतेंदु युगीन हिंदी को सामान्य हिंदी में लिखिए:
  • (क) आगे भी इस देश में जो प्रधान शासक आए, अंत को उनको जाना पड़ा।
    सामान्य हिंदी: इस देश में पहले भी जो प्रधान शासक आए, अंत में उन्हें जाना ही पड़ा।
  • (ख) आप किस को आए थे और क्या कर चले?
    सामान्य हिंदी: आप किस उद्देश्य से आए थे और क्या करके जा रहे हैं?
  • (ग) उनका रखाया एक आदमी नौकर न रखा।
    सामान्य हिंदी: उनके कहने से (या सिफारिश करने से) एक आदमी भी नौकर नहीं रखा गया।
  • (घ) पर आशीर्वाद करता हूँ कि तू फिर उठे और अपने प्राचीन गौरव और यश को फिर से लाभ करे।
    सामान्य हिंदी: पर आशीर्वाद देता हूँ कि तू (भारत) फिर से उन्नति करे और अपना प्राचीन गौरव और यश फिर से प्राप्त करे।
शब्द-छवि (Word Meanings)
शब्द (Word)अर्थ (Meaning)
चिरस्थायीहमेशा रहने वाला / टिकाऊ
करुणोत्पादककरुणा (दया/दुख) उत्पन्न करने वाला
विषादगहरा दुख / उदासी
आविर्भावप्रकट होना / आगमन
दुखांतजिसका अंत दुखद हो (Tragic)
सुखांतजिसका अंत सुखद हो (Happy Ending)
सूत्रधारनाटक का संचालन करने वाला (Director)
लीलामयनाटकीय / खेल जैसा
पटखनीचित कर देना / हरा देना
तिलांजलित्याग देना / छोड़ देना
पायमालबर्बाद / नष्ट (पांवों से कुचला हुआ)
आरालकड़ी चीरने का औजार (यहाँ कष्ट के संदर्भ में)
विच्छेदटूटना / अलग होना
ताबसामर्थ्य / शक्ति

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