रजनी (Rajani)
एनसीईआरटी समाधान • कक्षा 11 हिंदी (आरोह) • मन्नू भंडारी (पटकथा)पाठ के साथ (Textbook Questions)
1. रजनी ने अमित के मुद्दे को गंभीरता से लिया, क्योंकि:
सही उत्तर: (ग) वह अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाने की सामर्थ्य रखती थी।
स्पष्टीकरण: रजनी का स्वभाव ही ऐसा था कि वह कहीं भी अन्याय होते नहीं देख सकती थी। यद्यपि वह अमित से स्नेह करती थी, लेकिन मुख्य कारण उसकी जुझारू प्रवृत्ति और अन्याय को सहन न करने की शक्ति थी।
स्पष्टीकरण: रजनी का स्वभाव ही ऐसा था कि वह कहीं भी अन्याय होते नहीं देख सकती थी। यद्यपि वह अमित से स्नेह करती थी, लेकिन मुख्य कारण उसकी जुझारू प्रवृत्ति और अन्याय को सहन न करने की शक्ति थी।
2. “जब किसी का बच्चा कमज़ोर होता है, तभी उसके माँ-बाप ट्यूशन लगवाते हैं… यह कोई मजबूरी तो है नहीं।”
हेडमास्टर का यह तर्क पूरी तरह गलत और गैर-जिम्मेदाराना है।
प्रसंग: यह संवाद स्कूल के हेडमास्टर ने रजनी से तब कहा जब वह अमित के जबरदस्ती ट्यूशन लगवाने की शिकायत लेकर उनके पास गई थी।
तर्क (आलोचना):
हेडमास्टर का यह तर्क पूरी तरह गलत और गैर-जिम्मेदाराना है।
- शिक्षा व्यापार नहीं है: स्कूल का काम शिक्षा देना है, दुकान चलाना नहीं कि “सामान पसंद न हो तो दूसरी जगह जाओ।”
- अमित कमजोर नहीं था: अमित पढ़ने में होशियार था, उसे जानबूझकर कम नंबर दिए गए ताकि वह ट्यूशन ले। यह ‘मजबूरी’ ही थी।
- भ्रष्टाचार: यह कथन शिक्षकों द्वारा फैलाए जा रहे ‘शिक्षा माफिया’ और भ्रष्टाचार का समर्थन करता है।
3. “तो एक और आंदोलन का मसला मिल गया” — फुसफुसाकर कही गई यह बात:
(क) किसने किस प्रसंग में कही?
यह बात रजनी के पति (रवि) ने तब कही जब रजनी ने हेडमास्टर की शिकायत लेकर ‘शिक्षा निदेशक’ (Director of Education) के पास जाने का फैसला किया।
(ख) इससे कहने वाले की किस मानसिकता का पता चलता है?
इससे पति की उदासीन और पलायनवादी मानसिकता का पता चलता है। वह मध्यमवर्गीय समाज के उस हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है जो अन्याय देखकर भी चुप रहना चाहता है और फालतू के पचड़ों (मसलों) में नहीं पड़ना चाहता।
यह बात रजनी के पति (रवि) ने तब कही जब रजनी ने हेडमास्टर की शिकायत लेकर ‘शिक्षा निदेशक’ (Director of Education) के पास जाने का फैसला किया।
(ख) इससे कहने वाले की किस मानसिकता का पता चलता है?
इससे पति की उदासीन और पलायनवादी मानसिकता का पता चलता है। वह मध्यमवर्गीय समाज के उस हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है जो अन्याय देखकर भी चुप रहना चाहता है और फालतू के पचड़ों (मसलों) में नहीं पड़ना चाहता।
4. रजनी धारावाहिक की इस कड़ी की मुख्य समस्या क्या है? क्या होता अगर…
मुख्य समस्या: शिक्षा के क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार और शिक्षकों द्वारा जबरदस्ती ट्यूशन लेने के लिए छात्रों पर दबाव डालना (Racket of Tuitions)।
(क) अगर अमित का पर्चा सचमुच खराब होता:
तो रजनी को आंदोलन करने का कोई आधार नहीं मिलता। तब यह अन्याय का मुद्दा न होकर केवल एक छात्र की असफलता का मामला रह जाता।
(ख) अगर संपादक रजनी का साथ न देता:
तो यह मुद्दा केवल स्कूल तक सीमित रह जाता। अखबार के माध्यम से ही यह जन-आंदोलन बना और बड़ी संख्या में लोग मीटिंग में आए। मीडिया के बिना बदलाव संभव नहीं हो पाता।
(क) अगर अमित का पर्चा सचमुच खराब होता:
तो रजनी को आंदोलन करने का कोई आधार नहीं मिलता। तब यह अन्याय का मुद्दा न होकर केवल एक छात्र की असफलता का मामला रह जाता।
(ख) अगर संपादक रजनी का साथ न देता:
तो यह मुद्दा केवल स्कूल तक सीमित रह जाता। अखबार के माध्यम से ही यह जन-आंदोलन बना और बड़ी संख्या में लोग मीटिंग में आए। मीडिया के बिना बदलाव संभव नहीं हो पाता।
पाठ के आस-पास (Around the Lesson)
1. “गलती करने वाला तो है ही गुनहगार, पर उसे बर्दाश्त करने वाला भी कम गुनहगार नहीं होता” — आप किसे सबसे ज़्यादा गुनहगार मानते हैं?
इस संवाद के संदर्भ में, मैं अन्याय सहने वाले (जैसे अमित के माता-पिता) को भी बराबर का गुनहगार मानता हूँ।
कारण: जब तक लोग डरकर अन्याय सहते रहेंगे (जैसे लीला बेन ने डर के मारे ट्यूशन लगवा ली), तब तक अत्याचारी का हौसला बढ़ता रहेगा। विरोध न करना ही भ्रष्टाचार को खाद-पानी देता है।
कारण: जब तक लोग डरकर अन्याय सहते रहेंगे (जैसे लीला बेन ने डर के मारे ट्यूशन लगवा ली), तब तक अत्याचारी का हौसला बढ़ता रहेगा। विरोध न करना ही भ्रष्टाचार को खाद-पानी देता है।
2. स्त्री के चरित्र की बनी-बनाई धारणा से रजनी का चेहरा किन मायनों में अलग है?
पारंपरिक रूप से भारतीय समाज में स्त्री को सहनशील, कोमल और घर तक सीमित माना जाता है। रजनी इस धारणा को तोड़ती है:
- जुझारू: वह अन्याय के खिलाफ लड़ती है, चुप नहीं बैठती।
- बहिर्मुखी: वह घर की चारदीवारी से निकलकर हेडमास्टर, डायरेक्टर और अखबार के दफ्तर तक जाती है।
- नेतृत्व क्षमता: वह जन-आंदोलन खड़ा करती है और मंच से भाषण देती है।
3. पाठ के अंत में मीटिंग के दृश्य का फिल्मांकन करने के लिए निर्देश।
यदि मैं निर्देशक होता, तो निम्नलिखित निर्देश देता:
- मंच सज्जा: पीछे एक बड़ा बैनर जिस पर लिखा हो – “शिक्षा के व्यवसायीकरण का विरोध”।
- ध्वनि प्रभाव (Sound): भीड़ का शोर, “इंकलाब जिंदाबाद” के नारे, और माइक की गूँज।
- कैमरा एंगल: कैमरा पहले भीड़ के गुस्से भरे चेहरों को दिखाए, फिर रजनी के आत्मविश्वास से भरे चेहरे पर ज़ूम करे।
- वेशभूषा: उपस्थित लोग सामान्य मध्यमवर्गीय कपड़ों में होंगे, जिनके चेहरों पर गंभीरता और आक्रोश हो।
4. पटकथा में दृश्यों का विभाजन (Scene Division) किस आधार पर करेंगे?
पटकथा में दृश्य (Scenes) स्थान (Location) बदलने पर बदलते हैं। इस पाठ में 7 दृश्य इस प्रकार हो सकते हैं:
- अमित (लीला बेन) का घर – रिजल्ट आने पर।
- रजनी का घर – जब वह पति से बात करती है।
- स्कूल – हेडमास्टर का कमरा।
- रजनी का घर – पति के साथ बहस।
- शिक्षा निदेशक (Director) का ऑफिस।
- अखबार का दफ्तर – संपादक के साथ।
- मीटिंग हॉल – जनसभा।
भाषा की बात (Language Study)
1. रेखांकित अंश का निहित अर्थ (Implied Meaning):
- (क) “वरना तुम तो मुझे काट ही देतीं।”
अर्थ: मुझे भूल जाना / उपेक्षा करना / अपने कार्यक्रम में शामिल न करना। - (ख) “अमित जब तक तुम्हारे भोग नहीं लगा लेता…”
अर्थ: जब तक अमित सबसे पहले तुम्हें नहीं मिल लेता या तुम्हारे यहाँ खा-पी नहीं लेता। (अगाध स्नेह प्रकट करना)। - (ग) “बस-बस, मैं समझ गया।”
अर्थ: बात को बीच में रोकना क्योंकि आगे की बात श्रोता को पहले ही समझ आ गई है। (असहमति या ऊब भी हो सकती है)।
2. कोड मिक्सिंग और कोड स्विचिंग (Code Mixing & Switching):
कोड मिक्सिंग (Code Mixing): जब बोलते समय एक भाषा के वाक्य में दूसरी भाषा के शब्द मिल जाते हैं।
उदाहरण (पाठ से):
कोड स्विचिंग (Code Switching): जब एक भाषा बोलते-बोलते वक्ता पूरी तरह दूसरी भाषा के वाक्य बोलने लगता है।
उदाहरण (संभावित):
उदाहरण (पाठ से):
- “ये मम्मी भी न, बस प्रॉब्लम ही प्रॉब्लम हैं इनके पास।” (हिंदी रूपांतरण: माँ भी न, बस समस्याएं ही समस्याएं हैं इनके पास।)
- “मेरा तो ब्लड प्रेशर हाई हो गया।” (हिंदी रूपांतरण: मेरा तो रक्तचाप बढ़ गया।)
- “तुम लोगों ने तो प्राइवेट ट्यूशन का धंधा खोल रखा है।” (हिंदी रूपांतरण: तुम लोगों ने निजी ट्यूशन का धंधा खोल रखा है।)
कोड स्विचिंग (Code Switching): जब एक भाषा बोलते-बोलते वक्ता पूरी तरह दूसरी भाषा के वाक्य बोलने लगता है।
उदाहरण (संभावित):
- “Do you think so?” (क्या तुम्हें ऐसा लगता है?)
- “Please get out of my room.” (कृपया मेरे कमरे से बाहर जाइए।)
- “It is disgusting!” (यह बहुत घृणित है!)
पटकथा की दुनिया (The World of Screenplay)
पटकथा (Screenplay) किसी भी फिल्म या धारावाहिक की नींव होती है। यह दर्शकों को दृश्य और संवाद के माध्यम से कहानी बताती है। इसके मुख्य संकेत हैं:
- कहानी/कथा: मूल प्लॉट क्या है।
- संवाद (Dialogues): पात्र क्या बोलेंगे।
- अदाएगी (Delivery): संवाद किस भाव (गुस्से, प्यार, व्यंग्य) में बोला जाएगा (कोष्ठक में निर्देश)।
- दृश्य (Scene): घटना कहाँ घट रही है (आंतरिक/बाहरी, दिन/रात)।
- मोंटाज (Montage): कम समय में कई दृश्यों को जोड़कर दिखाना (जैसे अमित की पढ़ाई और बेचैनी को एक साथ दिखाना)।
शब्द-छवि (Word Meanings)
| शब्द (Word) | अर्थ (Meaning) |
|---|---|
| कांग्रेचुलेशंस | बधाई हो |
| हाफ-ईयरली | अर्धवार्षिक / छमाही |
| बेगुनाह | निर्दोष / जिसका कोई दोष न हो |
| हिकारत | घृणा / उपेक्षा / नीची नज़र से देखना |
| डायरेक्टर ऑफ एजुकेशन | शिक्षा निदेशक |
| रिकगनाइज | मान्यता प्राप्त |
| रिसर्च प्रोजेक्ट | शोध परियोजना |
| कंडक्ट | संचालन / आचरण |
| सुनतीच नई (लहजा) | सुनती ही नहीं |
| दखलअंदाजी | हस्तक्षेप (Interference) |
| पेरेंट | अभिभावक (माता-पिता) |
| इंपोर्टेंट मैटर्स | महत्वपूर्ण विषय |
| बाकायदा | नियम या कायदे के अनुसार |
| फोकस करना | ध्यान केंद्रित करना / मुद्दा बनाना |
| अप्रूव्ड | स्वीकृत / मंजूर |
| मोंटाज | दृश्यों का संयोजन (Editing technique) |