भक्तिन
महादेवी वर्मा • आरोह भाग 2 (अध्याय 10)
एक सेविका का समर्पण और संघर्षमयी जीवन
पाठ के साथ (प्रश्न-उत्तर)
1. भक्तिन अपना वास्तविक नाम लोगों से क्यों छुपाती थी? यह नाम उसे किसने और क्यों दिया होगा?
भक्तिन का वास्तविक नाम ‘लक्ष्मीन’ (लक्ष्मी) था, जिसका अर्थ है धन की देवी।
परंतु उसके जीवन में धन-दौलत का अभाव था। उसका नाम उसके भाग्य के बिल्कुल विपरीत था। लोग उसके नाम का मज़ाक न उड़ाएँ, इसलिए वह इसे छुपाती थी।
नाम किसने दिया: जब वह पहली बार नौकरी के लिए महादेवी जी के पास आई, तो उसके गले में कंठी-माला और सादगी देखकर महादेवी वर्मा ने उसे ‘भक्तिन’ नाम दिया।
परंतु उसके जीवन में धन-दौलत का अभाव था। उसका नाम उसके भाग्य के बिल्कुल विपरीत था। लोग उसके नाम का मज़ाक न उड़ाएँ, इसलिए वह इसे छुपाती थी।
नाम किसने दिया: जब वह पहली बार नौकरी के लिए महादेवी जी के पास आई, तो उसके गले में कंठी-माला और सादगी देखकर महादेवी वर्मा ने उसे ‘भक्तिन’ नाम दिया।
2. दो कन्या-रत्न पैदा करने पर भक्तिन पुत्र-महिमा में अंधी अपनी जेठानियों द्वारा घृणा व उपेक्षा का शिकार बनी। क्या आप इससे सहमत हैं कि ‘स्त्री ही स्त्री की दुश्मन होती है’?
भक्तिन की सास और जेठानियाँ (स्त्रियाँ) ही उसे ताने देती थीं और प्रताड़ित करती थीं क्योंकि उसने बेटा नहीं जन्मा। जबकि उसका पति उसे बहुत चाहता था।
इस संदर्भ में यह कहना आंशिक रूप से सही है कि पितृसत्तात्मक सोच (Patriarchy) को आगे बढ़ाने में कई बार स्त्रियाँ ही स्त्रियों की दुश्मन बन जाती हैं। वे समाज की रूढ़ियों को हथियार बनाकर दूसरी स्त्री का शोषण करती हैं, जैसा भक्तिन के साथ हुआ।
इस संदर्भ में यह कहना आंशिक रूप से सही है कि पितृसत्तात्मक सोच (Patriarchy) को आगे बढ़ाने में कई बार स्त्रियाँ ही स्त्रियों की दुश्मन बन जाती हैं। वे समाज की रूढ़ियों को हथियार बनाकर दूसरी स्त्री का शोषण करती हैं, जैसा भक्तिन के साथ हुआ।
3. भक्तिन की बेटी पर पंचायत द्वारा जबरन पति थोपा जाना किस सामाजिक परंपरा का प्रतीक है?
यह घटना स्त्री के मानवाधिकारों के हनन का प्रतीक है।
भक्तिन की विधवा बेटी शादी नहीं करना चाहती थी, लेकिन पंचायत ने एक ‘तीतरबाज़’ युवक (जेठ का साला) को जबरदस्ती उसका पति घोषित कर दिया। यह दर्शाता है कि समाज में स्त्री को अपने विवाह का निर्णय लेने की स्वतंत्रता नहीं है और पुरुष प्रधान समाज उसे अपनी संपत्ति समझता है।
भक्तिन की विधवा बेटी शादी नहीं करना चाहती थी, लेकिन पंचायत ने एक ‘तीतरबाज़’ युवक (जेठ का साला) को जबरदस्ती उसका पति घोषित कर दिया। यह दर्शाता है कि समाज में स्त्री को अपने विवाह का निर्णय लेने की स्वतंत्रता नहीं है और पुरुष प्रधान समाज उसे अपनी संपत्ति समझता है।
4. ‘भक्तिन अच्छी है, यह कहना कठिन होगा’—लेखिका ने ऐसा क्यों कहा?
लेखिका ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि भक्तिन में सद्गुणों के साथ-साथ कई दुर्गुण भी थे:
- वह झूठ बोलती थी और उसे ‘इधर-उधर’ करके सही साबित करने में माहिर थी।
- वह घर में रखे पैसे (भंडार घर की मटकी) को अपना समझकर छुपा लेती थी (चोरी जैसा व्यवहार)।
- वह अपनी बात को मनवाने के लिए तर्क-कुतर्क करती थी और दूसरों को अपने अनुसार बदल लेती थी, पर खुद नहीं बदलती थी।
5. भक्तिन द्वारा शास्त्र के प्रश्न को सुविधा से सुलझा लेने का क्या उदाहरण लेखिका ने दिया है?
लेखिका को भक्तिन का सिर मुंडवाना (घुटवाना) पसंद नहीं था। जब लेखिका ने उसे रोका और कहा कि यह शास्त्रों में नहीं लिखा है, तो भक्तिन ने तुरंत उत्तर दिया—“तीरथ गए मुंडाए सिद्ध” (तीर्थ जाने पर सिद्ध लोग भी सिर मुंडवाते हैं)।
उसने शास्त्र का हवाला देकर लेखिका को चुप करा दिया, जबकि उसे शास्त्रों का कोई ज्ञान नहीं था। उसने अपनी सुविधा के लिए तर्क गढ़ लिया।
6. भक्तिन के आ जाने से महादेवी अधिक देहाती कैसे हो गईं?
भक्तिन ने महादेवी जी को अपने रंग में रंग लिया।
- लेखिका को अब ज्वार-बाजरे की मोटी रोटी, मकई का दलिया और गुड़ की चाय अच्छी लगने लगी।
- वे देहाती भाषा और मुहावरे समझने लगीं।
- भक्तिन ने उन्हें अपनी देहाती जीवनशैली सिखा दी, जबकि लेखिका भक्तिन को अपनी शहरी आदतें (जैसे साफ़-सफ़ाई या पढ़ना) नहीं सिखा पाईं।
भाषा की बात (लोक-भाषा का रूपांतरण)
नीचे दिए गए देहाती वाक्यों का खड़ी बोली (मानक हिंदी) में रूपांतरण करें।
(क) ई लहुरी बिटिया की छोहरिया है, और उ पतोहू की।
रूपांतरण: यह छोटी बेटी की लड़की है और वह बड़ी बहू की।
(ख) तुम पचै घूमत-फिरति हौ, चलौ तनिक हाथ बटाय लेउ।
रूपांतरण: तुम लोग (बेकार) घूमते-फिरते हो, चलो थोड़ी मदद करवा दो।
(ग) हम कुकुरी-बिलारी न होयँ, हमार मन पुसाई तौ हम दूसरा के जाब नाहिं…
रूपांतरण: हम कुतिया-बिल्ली (जानवर) नहीं हैं। हमारा मन करेगा तो हम दूसरों के पास नहीं जाएंगे… (स्वाभिमान का भाव)।
शब्द-छवि (शब्दावली)
कठिन शब्दों के अर्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| नहर (नैहर) | मायका |
| जिठौत | जेठ का पुत्र |
| अजिया ससुर | पति का दादा |
| होरहा | हरे अनाज (चने/मटर) का आग पर भुना रूप |
| दुर्वह | जिसे सहना कठिन हो |