काले मेघा पानी दे
धर्मवीर भारती • आरोह भाग 2 (अध्याय 12)
तर्क बनाम विश्वास: विज्ञान की दृष्टि और लोक-आस्था का द्वंद्व
पाठ के साथ (प्रश्न-उत्तर)
1. लोगों ने लड़कों की टोली को ‘मेंढक-मंडली’ और ‘इंदर सेना’ नाम किस आधार पर दिया?
लोगों की दृष्टि के अनुसार दो अलग-अलग नाम दिए गए:
- मेंढक-मंडली: जो लोग इन नंग-धड़ंग, कीचड़ में लथपथ लड़कों के शोर-शराबे और उछल-कूद को पसंद नहीं करते थे, उन्होंने चिढ़कर इन्हें ‘मेंढक-मंडली’ कहा।
- इंदर सेना: जो लोग मानते थे कि ये बच्चे इंद्र भगवान (वर्षा के देवता) से पानी मांग सकते हैं, उन्होंने श्रद्धावश इन्हें ‘इंदर सेना’ कहा।
2. जीजी ने इंदर सेना पर पानी फेंके जाने को किस तरह सही ठहराया?
लेखक इसे पानी की बर्बादी मानता था, लेकिन जीजी ने इसे ‘त्याग’ और ‘अर्घ्य’ बताकर सही ठहराया।
जीजी का तर्क:
जीजी का तर्क:
- देवता से कुछ पाने के लिए पहले कुछ चढ़ाना (त्याग करना) पड़ता है।
- यह पानी की बर्बादी नहीं, बल्कि इंद्र भगवान को दिया गया अर्घ्य है।
- जैसे किसान फसल पाने के लिए पहले खेत में बीज बोता है, वैसे ही हम पानी बो रहे हैं ताकि बादलों से वर्षा रूपी फसल मिले।
3. ‘पानी दे, गुड़धानी दे’—मेघों से पानी के साथ-साथ गुड़धानी की माँग क्यों की जा रही है?
‘गुड़धानी’ का अर्थ है गुड़ और अनाज (भुने हुए गेहूं/चने) का लड्डू।
मेघों से गुड़धानी मांगने का प्रतीकात्मक अर्थ है—समृद्धि और पेट भरने के लिए अनाज। पानी केवल प्यास बुझाने के लिए नहीं, बल्कि अच्छी फसल के लिए भी ज़रूरी है। यदि वर्षा होगी, तो ईख (गन्ना) और धान की फसल अच्छी होगी, जिससे गुड़धानी बनेगी और बच्चों को खाने को मिलेगा। यह जीवन की खुशहाली की मांग है।
मेघों से गुड़धानी मांगने का प्रतीकात्मक अर्थ है—समृद्धि और पेट भरने के लिए अनाज। पानी केवल प्यास बुझाने के लिए नहीं, बल्कि अच्छी फसल के लिए भी ज़रूरी है। यदि वर्षा होगी, तो ईख (गन्ना) और धान की फसल अच्छी होगी, जिससे गुड़धानी बनेगी और बच्चों को खाने को मिलेगा। यह जीवन की खुशहाली की मांग है।
4. ‘गगरी फूटी बैल पियासा’—इंदर सेना के इस खेलगीत में बैलों के प्यासा रहने की बात क्यों मुखरित हुई है?
यह पंक्ति भारतीय कृषि जीवन की त्रासदी को दिखाती है।
बैल खेती (कृषि) की रीढ़ हैं। ‘गगरी फूटी’ का अर्थ है कि स्रोत सूख गए हैं और ‘बैल पियासा’ का अर्थ है कि खेती नष्ट हो रही है। इंदर सेना के आने के बाद भी अगर बैल प्यासे हैं, तो इसका मतलब है कि अभी तक सच्ची राहत (बारिश) नहीं मिली है। यह सूखे की भयावहता को दर्शाता है।
बैल खेती (कृषि) की रीढ़ हैं। ‘गगरी फूटी’ का अर्थ है कि स्रोत सूख गए हैं और ‘बैल पियासा’ का अर्थ है कि खेती नष्ट हो रही है। इंदर सेना के आने के बाद भी अगर बैल प्यासे हैं, तो इसका मतलब है कि अभी तक सच्ची राहत (बारिश) नहीं मिली है। यह सूखे की भयावहता को दर्शाता है।
5. इंदर सेना सबसे पहले ‘गंगा मैया की जय’ क्यों बोलती है? नदियों का भारतीय परिवेश में क्या महत्त्व है?
भारतीय संस्कृति में गंगा नदी को ‘मोक्षदायिनी’ और जीवन का स्रोत माना जाता है। इसलिए किसी भी शुभ कार्य या वर्षा की गुहार लगाने से पहले सबसे पवित्र नदी का जयकारा लगाया जाता है।
नदियों का महत्त्व: भारत एक कृषि प्रधान देश है और नदियाँ यहाँ की अर्थव्यवस्था और संस्कृति की आधार हैं। वे केवल जल स्रोत नहीं, बल्कि पूजनीय ‘माँ’ के समान हैं।
नदियों का महत्त्व: भारत एक कृषि प्रधान देश है और नदियाँ यहाँ की अर्थव्यवस्था और संस्कृति की आधार हैं। वे केवल जल स्रोत नहीं, बल्कि पूजनीय ‘माँ’ के समान हैं।
6. “रिश्तों में हमारी भावना-शक्ति का बँट जाना…” जीजी के प्रति लेखक की भावना के संदर्भ में इस कथन की समीक्षा कीजिए।
लेखक (धर्मवीर भारती) विज्ञान को मानने वाले ‘आर्य समाजी’ विचारों के युवक थे, जो अंधविश्वासों के सख्त खिलाफ थे। लेकिन जीजी (जो उनकी सगी नहीं थीं, पर माँ से बढ़कर थीं) के प्रति उनका प्रेम अगाध था।
जब जीजी ने उनसे पूजा-पाठ करवाया या पानी फिकवाया, तो लेखक ने तर्क से उसका विरोध किया, लेकिन जीजी के प्रेम (भावना) के आगे उनका तर्क (बुद्धि) हार गया। वे न चाहते हुए भी जीजी की खुशी के लिए झुक गए। यह सिद्ध करता है कि आपसी प्रेम और रिश्तों की ऊष्मा, तर्कों के जंगल में सही रास्ता खोज ही लेती है।
जब जीजी ने उनसे पूजा-पाठ करवाया या पानी फिकवाया, तो लेखक ने तर्क से उसका विरोध किया, लेकिन जीजी के प्रेम (भावना) के आगे उनका तर्क (बुद्धि) हार गया। वे न चाहते हुए भी जीजी की खुशी के लिए झुक गए। यह सिद्ध करता है कि आपसी प्रेम और रिश्तों की ऊष्मा, तर्कों के जंगल में सही रास्ता खोज ही लेती है।
पाठ के आस-पास (महत्वपूर्ण बिंदु)
त्याग (Sacrifice) की परिभाषा (जीजी के अनुसार)
सच्चा त्याग:
जीजी कहती हैं कि “अगर तेरे पास लाखों-करोड़ों रुपये हैं और तूने उसमें से दो-चार रुपये दे दिए, तो वह त्याग नहीं है। त्याग तो वह है कि जो चीज़ तेरे पास भी कम है, जिसकी तुझे भी ज़रूरत है, फिर भी अपनी ज़रूरत पीछे रखकर तू उसे दूसरों के कल्याण के लिए दे दे।”
“त्याग का फल उसी को मिलता है।”
“त्याग का फल उसी को मिलता है।”
शब्द-छवि (शब्दावली)
कठिन शब्दों के अर्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| गुड़धानी | गुड़ और चने/गेहूं से बना लड्डू |
| टेरते | पुकारते / आवाज़ लगाते |
| पखवारा | पंद्रह दिन की अवधि |
| दसतपा | जेठ महीने के दस सबसे गर्म दिन |
| अरवा चावल | बिना उबाले धान से निकाला गया चावल (पूजा हेतु) |