पतंग
आलोक धन्वा • आरोह भाग 2 (अध्याय 2)
शरद ऋतु का आगमन और बाल-सुलभ उमंग का चित्रण
कविता के साथ (प्रश्न-उत्तर)
1. ‘सबसे तेज़ बौछारें गयीं, भादो गया’ के बाद प्रकृति में जो परिवर्तन कवि ने दिखाया है, उसका वर्णन अपने शब्दों में करें।
भादो मास (वर्षा ऋतु) के जाने के बाद प्रकृति में निम्नलिखित परिवर्तन होते हैं:
- स्वच्छ आकाश: आकाश साफ़ और निर्मल हो जाता है, बादल छंट जाते हैं।
- चमकीला सवेरा: सूरज का प्रकाश लाल और चमकीला हो जाता है, जिसकी तुलना कवि ने ‘खरगोश की आँखों’ से की है।
- शरद ऋतु का आगमन: शरद ऋतु अपनी ‘नई चमकीली साइकिल’ चलाते हुए उमंग और उत्साह के साथ आती है।
- पतंग का मौसम: मौसम सुहावना हो जाता है, हवा मुलायम हो जाती है, जो पतंग उड़ाने के लिए अनुकूल होती है।
2. सोचकर बताएं कि पतंग के लिए सबसे हल्की और रंगीन चीज़, सबसे पतला कागज़, सबसे पतली कमानी जैसे विशेषणों का प्रयोग क्यों किया है?
कवि ने इन अतिशयोक्तियों (Superlatives) का प्रयोग निम्नलिखित कारणों से किया है:
- बाल-सुलभ कोमलता: पतंग की नाजुकता और बच्चों की कोमल भावनाओं के बीच समानता दिखाने के लिए।
- कौतूहल जगाना: पाठकों का ध्यान पतंग की विशिष्टता और उसके आकाश में उड़ने के चमत्कार की ओर खींचने के लिए।
- गतिशीलता: यह बताने के लिए कि केवल हल्की चीजें ही आकाश की ऊंचाइयों को छू सकती हैं, जैसे बच्चों की कल्पनाएँ।
3. बिंब (Imagery) स्पष्ट करें।
कवि ने शरद ऋतु के आगमन का मानवीकरण करते हुए अत्यंत सुंदर ‘गतिशील बिंब’ (Dynamic Imagery) प्रस्तुत किए हैं:
- दृश्य बिंब (Visual): खरगोश की आँखों जैसा लाल सवेरा, पुलों को पार करता शरद, चमकीली साइकिल।
- श्रव्य बिंब (Auditory): घंटी बजाते हुए ज़ोर-ज़ोर से।
- स्पर्श बिंब (Tactile): आकाश को मुलायम बनाते हुए।
- क्रियात्मक बिंब (Kinetic): साइकिल तेज़ चलाते हुए, इशारों से बुलाते हुए।
4. जन्म से ही वे अपने साथ लाते हैं कपास—कपास के बारे में सोचें कि कपास से बच्चों का क्या संबंध बन सकता है?
कोमलता और लचीलेपन का प्रतीक
कपास और बच्चों में गहरा संबंध है:
- कोमलता: कपास की तरह बच्चे भी शारीरिक रूप से कोमल और नाजुक होते हैं।
- लचीलापन (Resilience): गिरने पर भी बच्चों को अक्सर चोट कम लगती है क्योंकि उनका शरीर लचीला होता है।
- निर्मलता: कपास का सफ़ेद रंग बच्चों के मन की पवित्रता और निश्छलता का प्रतीक है।
5. पतंगों के साथ-साथ वे भी उड़ रहे हैं—बच्चों का उड़ान से कैसा संबंध बनता है?
यह एक लाक्षणिक प्रयोग है। जब पतंग आकाश में ऊँची उड़ान भरती है, तो बच्चों का मन भी उसी के साथ उड़ता है।
वे शारीरिक रूप से धरती पर होते हैं, लेकिन मानसिक रूप से वे आकाश में विचरते हैं। पतंग की हर हरकत के साथ वे रोमांचित होते हैं, मानो वे स्वयं हवा में तैर रहे हों। यह एकाग्रता और तल्लीनता की पराकाष्ठा है।
वे शारीरिक रूप से धरती पर होते हैं, लेकिन मानसिक रूप से वे आकाश में विचरते हैं। पतंग की हर हरकत के साथ वे रोमांचित होते हैं, मानो वे स्वयं हवा में तैर रहे हों। यह एकाग्रता और तल्लीनता की पराकाष्ठा है।
6. निम्नलिखित पंक्तियों को पढ़कर प्रश्नों का उत्तर दीजिए (छतों को नरम बनाना, दिशाओं को मृदंग की तरह बजाना)।
(क) दिशाओं को मृदंग की तरह बजाने का क्या तात्पर्य है?
जब बच्चे पतंग लूटने या उड़ाने के लिए छतों पर बेतहाशा दौड़ते हैं, तो उनके पैरों की धमक (टप-टप) से एक लयबद्ध ध्वनि उत्पन्न होती है। यह आवाज़ चारों दिशाओं में गूँजती है, मानो कोई मृदंग (ढोलक जैसा वाद्ययंत्र) बज रहा हो।
(ख) जब पतंग सामने हो तो छतों पर दौड़ते हुए क्या आपको छत कठोर लगती है?
नहीं, जब पतंग सामने हो और मन में उमंग हो, तो छत की कठोरता महसूस नहीं होती। बच्चों का उत्साह उन्हें शारीरिक कष्ट या कठोरता का अहसास नहीं होने देता। वे छत को भी ‘नरम’ महसूस करते हैं।
(ग) खतरनाक परिस्थितियों का सामना करने के बाद आप दुनिया की चुनौतियों के सामने स्वयं को कैसा महसूस करते हैं?
खतरनाक परिस्थितियों (जैसे छतों के किनारों से गिरकर बच जाना) का सामना करने के बाद आत्मविश्वास बढ़ जाता है। मन से भय निकल जाता है और हम ‘सुनहले सूरज’ (उज्ज्वल भविष्य) के सामने और भी निडर होकर चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हो जाते हैं।
जब बच्चे पतंग लूटने या उड़ाने के लिए छतों पर बेतहाशा दौड़ते हैं, तो उनके पैरों की धमक (टप-टप) से एक लयबद्ध ध्वनि उत्पन्न होती है। यह आवाज़ चारों दिशाओं में गूँजती है, मानो कोई मृदंग (ढोलक जैसा वाद्ययंत्र) बज रहा हो।
(ख) जब पतंग सामने हो तो छतों पर दौड़ते हुए क्या आपको छत कठोर लगती है?
नहीं, जब पतंग सामने हो और मन में उमंग हो, तो छत की कठोरता महसूस नहीं होती। बच्चों का उत्साह उन्हें शारीरिक कष्ट या कठोरता का अहसास नहीं होने देता। वे छत को भी ‘नरम’ महसूस करते हैं।
(ग) खतरनाक परिस्थितियों का सामना करने के बाद आप दुनिया की चुनौतियों के सामने स्वयं को कैसा महसूस करते हैं?
खतरनाक परिस्थितियों (जैसे छतों के किनारों से गिरकर बच जाना) का सामना करने के बाद आत्मविश्वास बढ़ जाता है। मन से भय निकल जाता है और हम ‘सुनहले सूरज’ (उज्ज्वल भविष्य) के सामने और भी निडर होकर चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हो जाते हैं।
कविता के आस-पास
1. आसमान में रंग-बिरंगी पतंगों को देखकर आपके मन में कैसे खयाल आते हैं?
आसमान में उड़ती रंग-बिरंगी पतंगों को देखकर मन में स्वतंत्रता और उन्मुक्तता का भाव जागता है। मन करता है कि हम भी पक्षियों की तरह खुले आकाश में उड़ें, सारी सीमाओं और बंधनों को तोड़कर ऊंचाइयों को छुएं। यह रंगीन सपने और आकांक्षाओं का प्रतीक लगती हैं।
2. ‘रोमांचित शरीर का संगीत’ का जीवन के लय से क्या संबंध है?
जब हम किसी कार्य में पूरी तरह लीन हो जाते हैं (जैसे बच्चे पतंग उड़ाते समय), तो शरीर और मन में एक अद्भुत तालमेल बन जाता है। यही ‘रोमांच’ है। जीवन की लय (Rhythm of Life) भी इसी उत्साह और एकाग्रता से बनती है। यह संगीत हमें गिरने से बचाता है और संतुलन प्रदान करता है।
3. ‘महज़ एक धागे के सहारे, पतंगों की धड़कती ऊँचाइयाँ’ उन्हें (बच्चों को) कैसे थाम लेती हैं?
धागा एक माध्यम है जो बच्चे को उसकी पतंग से जोड़ता है। जब पतंग आकाश में हिलोरे लेती है, तो बच्चे की एकाग्रता उस धागे पर टिकी होती है। वह धागा केवल पतंग को ही नहीं थामता, बल्कि बच्चे के चंचल मन को भी संतुलित करता है और उसे गिरने से बचाता है। यह एक अदृश्य डोर है जो सपनों (पतंग) और यथार्थ (बच्चे) को जोड़े रखती है।