कैमरे में बंद अपाहिज

रघुवीर सहाय • आरोह भाग 2 (अध्याय 4)

मीडिया की संवेदनहीनता और ‘सामाजिक उद्देश्य’ का मुखौटा

कविता के साथ (प्रश्न-उत्तर)

1. कविता में कुछ पंक्तियाँ कोष्ठकों (Brackets) में रखी गई हैं—आपकी समझ से इसका क्या औचित्य है?
कोष्ठकों में दी गई पंक्तियाँ कविता के मुख्य स्वर को अलग करती हैं। इनका औचित्य निम्नलिखित है:
  • ये संचालक/कैमरामैन के मन के विचार या ‘निर्देश’ (Stage Directions) हैं, जो दर्शकों को सुनाई नहीं देते।
  • ये मीडिया की बनावटी दुनिया और उनकी असली मंशा को उजागर करते हैं (जैसे- ‘कैमरा दिखाओ इसे बड़ा-बड़ा’)।
  • ये नाटकीयता पैदा करती हैं और कविता को एक ‘पटकथा’ (Script) का रूप देती हैं।
2. ‘कैमरे में बंद अपाहिज’ करुणा के मुखौटे में छिपी क्रूरता की कविता है—विचार कीजिए।
यह कथन पूर्णतः सत्य है। यह कार्यक्रम ऊपर से ‘सामाजिक उद्देश्य’ का दावा करता है और अपाहिज व्यक्ति के प्रति करुणा (Sympathy) दिखाने का नाटक करता है।

परंतु वास्तविकता में, संचालक का उद्देश्य उस व्यक्ति के दर्द को बेचकर टी.आर.पी. (TRP) कमाना है। वे अपाहिज को कुरेद-कुरेद कर रुलाते हैं और उसकी पीड़ा का तमाशा बनाते हैं। यह करुणा नहीं, बल्कि ‘व्यावसायिक क्रूरता’ है।
3. ‘हम समर्थ शक्तिवान और हम एक दुर्बल को लाएंगे’ पंक्ति के माध्यम से कवि ने क्या व्यंग्य किया है?
कवि ने मीडिया की अहंकार और शक्ति पर व्यंग्य किया है।
  • ‘समर्थ शक्तिवान’: मीडिया वाले खुद को भगवान समझते हैं। वे मानते हैं कि वे किसी को भी बना या बिगाड़ सकते हैं और किसी की भी छवि गढ़ सकते हैं।
  • ‘दुर्बल’: अपाहिज व्यक्ति को दुर्बल कहा गया है, न केवल शारीरिक रूप से, बल्कि मीडिया की ताकत के सामने उसकी लाचारी को दिखाने के लिए।
4. यदि शारीरिक रूप से चुनौती का सामना कर रहे व्यक्ति और दर्शक, दोनों एक साथ रोने लगेंगे, तो उससे प्रश्नकर्ता का कौन-सा उद्देश्य पूरा होगा?
यदि दोनों एक साथ रोने लगेंगे, तो प्रश्नकर्ता का ‘व्यावसायिक उद्देश्य’ (Commercial Goal) पूरा हो जाएगा।
उसका कार्यक्रम ‘सफल’ और ‘रोचक’ माना जाएगा। दर्शकों की भावनात्मक भागीदारी से चैनल की लोकप्रियता बढ़ेगी और उन्हें आर्थिक लाभ होगा। मीडिया के लिए आँसू केवल ‘बिकाऊ माल’ हैं।
5. ‘पर्दे पर वक्त की कीमत है’ कहकर कवि ने पूरे साक्षात्कार के प्रति अपना नज़रिया किस रूप में रखा है?
यह पंक्ति मीडिया की व्यावसायिक मानसिकता (Business Mentality) को तीखे रूप में उजागर करती है।
कवि बताना चाहता है कि मीडिया के लिए किसी की पीड़ा या भावनाओं का कोई महत्व नहीं है, उनके लिए केवल ‘समय’ और ‘पैसा’ महत्वपूर्ण है। यदि अपाहिज व्यक्ति तय समय में नहीं रोया, तो वे कार्यक्रम बंद कर देंगे। यह सहानुभूति के अभाव की पराकाष्ठा है।

कविता के आस-पास (गतिविधि)

1. यदि आपको शारीरिक चुनौती का सामना कर रहे किसी मित्र का परिचय लोगों से करवाना हो, तो किन शब्दों में करवाएँगे?
मैं अपने मित्र का परिचय उसकी ‘कमियों’ से नहीं, बल्कि उसकी योग्यताओं और जीवटता से करवाऊँगा।

उदाहरण: “यह मेरा मित्र ‘अमन’ है। यह एक बेहतरीन चित्रकार है और इसने कई प्रतियोगिताओं में पुरस्कार जीते हैं। इसकी व्हीलचेयर इसकी उड़ान को नहीं रोकती, बल्कि इसके हौसले हम सभी के लिए प्रेरणा हैं।”
4. खबर के अंश (पवन, बिहार) को पढ़कर एक काल्पनिक साक्षात्कार कीजिए।

खबर पर आधारित काल्पनिक साक्षात्कार
एंकर: हमारे साथ हैं बिहार के नन्हे धावक पवन। स्वागत है पवन!
एंकर: पवन, 5 साल की उम्र और 5 किलोमीटर की दौड़! यह हौसला कहाँ से आया?
पवन: जी, मुझे ‘उम्मीद स्कूल’ के बच्चों और ओडिशा के बुधिया से प्रेरणा मिली। मैं साबित करना चाहता हूँ कि हाथ-पैर न होना मजबूरी नहीं है।
एंकर: दौड़ते समय दर्द नहीं होता?
पवन: दर्द तो होता है, पर जब लोग ताली बजाते हैं और साथ दौड़ते हैं, तो दर्द गायब हो जाता है। मेरा सपना कश्मीर से कन्याकुमारी तक दौड़ने का है।
एंकर: आप सचमुच एक ‘जादूगर’ हैं, पवन। धन्यवाद!
learncbsehub.in