उषा

शमशेर बहादुर सिंह • आरोह भाग 2 (अध्याय 5)

राख से लीपा हुआ चौका: भोर की पवित्रता और नमी का प्रतीक

कविता के साथ (प्रश्न-उत्तर)

1. कविता के किन उपमानों को देखकर यह कहा जाता है कि ‘उषा’ कविता गाँव की सुबह का गतिशील शब्द चित्र है?
‘उषा’ कविता में कवि ने गाँव की सुबह का एक गतिशील शब्द-चित्र खींचा है। कवि ने प्रकृति की गति को शब्दों में पिरोने के लिए घरेलू और ग्रामीण उपमानों का प्रयोग किया है:
  • राख से लीपा हुआ चौका: जो अभी गीला है (भोर की नमी)।
  • काली सिल: जिस पर केसर पीसा गया हो (अंधेरे में सूर्य की लालिमा)।
  • स्लेट पर खड़िया चाक: (भोर का धुंधलापन)।
  • नीले जल में गौर झिलमिलाती देह: (सूर्य का उदय)।
ये सभी उपमान गाँव के जन-जीवन और रसोई से जुड़े हैं, जो सुबह की गतिविधियों को दर्शाते हैं।
2. ‘भोर का नभ / राख से लीपा हुआ चौका / (अभी गीला पड़ा है)’ — कोष्ठक में दी गई पंक्ति का क्या विशेष अर्थ है?
नई कविता में कोष्ठक (Brackets) अतिरिक्त जानकारी या विशेष भाव को स्पष्ट करने के लिए प्रयोग किए जाते हैं।

पंक्ति “(अभी गीला पड़ा है)” का विशेष अर्थ यह है कि:
  • ताज़गी और नमी: यह बताता है कि सुबह की ओस और वातावरण में अभी नमी बाकी है।
  • समय का संकेत: यह दर्शाता है कि चौका अभी-अभी लीपा गया है, यानी भोर का समय बिल्कुल ताज़ा है।
  • पवित्रता: गीला चौका पवित्रता और शुद्धता का प्रतीक है, जो गाँव की संस्कृति को दर्शाता है।
3. अपने परिवेश के उपमानों का प्रयोग करते हुए सूर्योदय और सूर्यास्त का शब्द चित्र खींचिए।


सूर्योदय: सुबह के समय सूर्य का उगना ऐसा लगता है जैसे किसी ने आकाश रूपी कैनवास पर सुनहरे रंग बिखेर दिए हों। यह एक नई शुरुआत और जोश का प्रतीक है, जैसे स्कूल जाने के लिए तैयार होता बच्चा।

सूर्यास्त: शाम के समय सूर्य ऐसा लगता है मानो थका हुआ श्रमिक अपने काम से लौटकर विश्राम करने जा रहा हो। आकाश का रंग हल्का लाल हो जाता है, जैसे किसी ने लाल चादर ओढ़ ली हो। यह दिन की समाप्ति और शांति का संदेश देता है।

तुलनात्मक विश्लेषण

4. सूर्योदय वर्णन: प्रसाद की ‘बीती विभावरी’, अज्ञेय की ‘बावरा अहेरी’ और शमशेर की ‘उषा’ का तुलनात्मक विश्लेषण करें।
तीनों कविताएँ सूर्योदय का वर्णन करती हैं, लेकिन उनके उपमान, शब्द-चयन और परिवेश भिन्न हैं:
1. उपमान (Metaphors):
  • प्रसाद (बीती विभावरी): प्रकृति का मानवीकरण किया है। अंबर को ‘पनघट’, तारों को ‘घड़े’ और उषा को ‘नागरी’ (चतुर स्त्री) बताया है।
  • अज्ञेय (बावरा अहेरी): सूर्य को एक ‘शिकारी’ (अहेरी) माना है जो अपनी किरणों का जाल फैलाकर सब कुछ समेट लेता है।
  • शमशेर (उषा): घरेलू उपमानों का प्रयोग किया है—राख से लीपा चौका, सिल, स्लेट।
2. शब्द चयन (Word Choice):
  • प्रसाद: तत्सम प्रधान, गेय और संगीतात्मक शब्दावली (मधु मुकुल, नवल रस)।
  • अज्ञेय: आधुनिक और औद्योगिक शब्दावली (मोटरों की धूल, चिमनियों का धुआं)।
  • शमशेर: सरल, सहज और ग्रामीण शब्दावली (चौका, सिल, राख)।
3. परिवेश (Setting):
  • ‘उषा’ में ग्रामीण परिवेश की शांति और पवित्रता है।
  • ‘बीती विभावरी’ में रोमानी और छायावादी परिवेश है।
  • ‘बावरा अहेरी’ में शहरी और औद्योगिक जीवन की हलचल है।

निष्कर्ष: मुझे जयशंकर प्रसाद की कविता अधिक अच्छी लगी क्योंकि उसमें प्रकृति का मानवीकरण अत्यंत सुंदर और लयात्मक है, जो पाठक को मंत्रमुग्ध कर देता है।
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