बादल राग
सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ • आरोह भाग 2 (अध्याय 6)
बादल: क्रांति और नवनिर्माण का प्रतीक
कविता के साथ (प्रश्न-उत्तर)
1. ‘अस्थिर सुख पर दुख की छाया’—पंक्ति में ‘दुख की छाया’ किसे कहा गया है और क्यों?
इस पंक्ति में ‘दुख की छाया’ बादलों (क्रांति) को कहा गया है।
कारण: जिस प्रकार बादल आने पर सूर्य ढक जाता है, उसी प्रकार क्रांति (बादल) आने पर पूंजीपतियों (शोषक वर्ग) का सुख अस्थिर हो जाता है। धनी वर्ग का सुख ‘अस्थिर’ है क्योंकि वह शोषण पर आधारित है। क्रांति का डर उनके सुख पर हमेशा ‘दुख की छाया’ बनकर मंडराता रहता है।
कारण: जिस प्रकार बादल आने पर सूर्य ढक जाता है, उसी प्रकार क्रांति (बादल) आने पर पूंजीपतियों (शोषक वर्ग) का सुख अस्थिर हो जाता है। धनी वर्ग का सुख ‘अस्थिर’ है क्योंकि वह शोषण पर आधारित है। क्रांति का डर उनके सुख पर हमेशा ‘दुख की छाया’ बनकर मंडराता रहता है।
2. ‘अशनि-पात से शापित उन्नत शत-शत वीर’—पंक्ति में किसकी ओर संकेत किया गया है?
इस पंक्ति में पूंजीपतियों और शोषक वर्ग की ओर संकेत किया गया है।
कवि कहता है कि जिस प्रकार आकाशीय बिजली (अशनि-पात) गिरने से बड़े-बड़े ऊँचे पहाड़ या वृक्ष क्षत-विक्षत हो जाते हैं, उसी प्रकार क्रांति के वज्रपात से समाज के बड़े-बड़े प्रतिष्ठित और अहंकारी लोग (उन्नत वीर) ही धराशायी होते हैं। गरीब या छोटे लोगों पर इसका बुरा असर नहीं पड़ता।
कवि कहता है कि जिस प्रकार आकाशीय बिजली (अशनि-पात) गिरने से बड़े-बड़े ऊँचे पहाड़ या वृक्ष क्षत-विक्षत हो जाते हैं, उसी प्रकार क्रांति के वज्रपात से समाज के बड़े-बड़े प्रतिष्ठित और अहंकारी लोग (उन्नत वीर) ही धराशायी होते हैं। गरीब या छोटे लोगों पर इसका बुरा असर नहीं पड़ता।
3. ‘विप्लव-रव से छोटे ही हैं शोभा पाते’—पंक्ति में ‘विप्लव-रव’ से क्या तात्पर्य है? ‘छोटे ही हैं शोभा पाते’ ऐसा क्यों कहा गया है?
- विप्लव-रव: इसका अर्थ है ‘क्रांति की गर्जना’ या ‘विनाश का शोर’।
- छोटे ही शोभा पाते हैं: जब आंधी-तूफ़ान आता है, तो बड़े पेड़ उखड़ जाते हैं, लेकिन छोटी घास और नन्हें पौधे लहलहाते रहते हैं।
4. बादलों के आगमन से प्रकृति में होने वाले किन-किन परिवर्तनों को कविता रेखांकित करती है?
बादलों (क्रांति) के आगमन से प्रकृति में निम्नलिखित परिवर्तन होते हैं:
- समीर (हवा) बहने लगती है।
- पृथ्वी के गर्भ में सोए हुए बीज (अंकुर) नवजीवन की आशा में सिर उठाकर देखने लगते हैं।
- मूसलाधार वर्षा से बड़े-बड़े वृक्ष धराशायी हो जाते हैं, परन्तु छोटे पौधे खिल उठते हैं।
- प्रकृति स्वच्छ और हरी-भरी हो जाती है।
व्याख्या कीजिए
1. “तिरती है समीर-सागर पर / अस्थिर सुख पर दुख की छाया…”
व्याख्या: कवि बादलों का आह्वान करते हुए कहता है कि तुम हवा रूपी सागर पर वैसे ही तैर रहे हो जैसे अस्थिर सुख पर दुख की छाया तैरती है। संसार का सुख क्षणभंगुर (Temporary) है। बादलों रूपी क्रांति मायावी है, जो जग के जलते हुए हृदय (तप्त पृथ्वी/शोषित समाज) को शीतलता प्रदान करने के लिए उमड़-घुमड़ रही है।
2. “अट्टालिका नहीं है रे / आतंक-भवन…”
व्याख्या: कवि कहता है कि अमीरों के ऊँचे-ऊँचे महल (अट्टालिकाएँ) केवल रहने के स्थान नहीं हैं, बल्कि वे ‘आतंक भवन’ हैं जहाँ से वे गरीबों का शोषण करते हैं। लेकिन बाढ़ (क्रांति) हमेशा कीचड़ (पंख) पर ही होती है। अर्थात, क्रांति का प्रवाह समाज के निचले हिस्से से ही शुरू होता है और महलों की नींव हिला देता है।
कला की बात (शिल्प सौंदर्य)
1. पूरी कविता में प्रकृति का मानवीकरण किया गया है। आपको कौन-सा रूप पसंद आया?
पूरी कविता में ‘मानवीकरण अलंकार’ है। मुझे ‘ए अनंत के चंचल शिशु सुकुमार’ वाला रूप पसंद आया। यहाँ बादलों को एक चंचल और कोमल बालक के रूप में चित्रित किया गया है, जो गर्जना भी करता है और नया जीवन भी देता है।
3. बादलों के लिए प्रयुक्त संबोधनों (ऐ विप्लव के वीर, ऐ जीवन के पारावार आदि) की व्याख्या करें।
कवि ने बादलों को क्रांतिदूत माना है, इसलिए ओजस्वी संबोधन दिए हैं:
- ऐ विप्लव के वीर: बादल क्रांति लाने वाला योद्धा है।
- ऐ जीवन के पारावार: बादल जीवन (पानी) का अथाह सागर है।
- मेरे पागल बादल: कवि का बादलों के प्रति गहरा अपनत्व और उन्मुक्तता।
- ऐ सम्राट: बादल आकाश में राजा की तरह छाए हुए हैं।
5. कविता में विशेषणों का सायास प्रयोग (जैसे- अस्थिर सुख)। अन्य उदाहरण छांटिए।
कवि ने विशेषणों का प्रयोग भावों को गहरा करने के लिए किया है। अन्य उदाहरण:
- दग्ध हृदय (तपा हुआ दिल/दुखी मन)
- निर्दय विप्लव (कठोर क्रांति)
- रुद्ध कोष (रुका हुआ खजाना)
- सुप्त अंकुर (सोया हुआ बीज)